होली की छुट्टी के बाद बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद कमजोर रही। बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट देखने को मिली। इस अचानक आई गिरावट से निवेशकों में चिंता बढ़ गई और बाजार में घबराहट का माहौल बन गया।
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ा झटका
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स लगभग 1,710 अंक गिरकर 78,529 के स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले साल अप्रैल के बाद का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी करीब 477 अंक गिरकर 24,389 के स्तर पर आ गया।
यह पिछले कई महीनों में पहली बार है जब निफ्टी 24,400 अंक के नीचे फिसला है। बाजार में आई इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
निवेशकों को भारी नुकसान
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट का असर निवेशकों की पूंजी पर भी पड़ा है। शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर लगभग 449 लाख करोड़ रुपये रह गया है।
सिर्फ एक दिन के कारोबार में ही निवेशकों की करीब 8 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति कम हो गई। इस वजह से कई निवेशकों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है।
गिरावट के पीछे मुख्य कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में आई गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं।
सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। ईरान को लेकर अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में युद्ध का खतरा बढ़ गया है। इससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।
भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर असर पड़ सकता है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई देता है।
रुपये की कमजोरी और एफआईआई की बिकवाली
भारतीय रुपये में भी कमजोरी देखने को मिली है। डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 92.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है। इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर हो सकता है।
इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने भी बाजार की स्थिति को कमजोर किया है। जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं तो बाजार में गिरावट का दबाव बढ़ जाता है।
आगे क्या हो सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात पर निर्भर करेगी। अगर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
कमजोर रुपये और वैश्विक अनिश्चितता का असर कंपनियों के मुनाफे पर भी पड़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और बाजार की स्थिति पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
