भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होता जा रहा है। सोमवार को रुपया पहली बार 96 के स्तर को पार कर गया और 96.17 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। विदेशी बाजार में बढ़ते दबाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक तनावों का असर भारतीय मुद्रा पर साफ दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले समय में रुपया और कमजोर हो सकता है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर
रुपये की गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मानी जा रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े हालात के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर रुपये और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
ट्रंप की चेतावनी और वैश्विक तनाव
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की ओर से हाल ही में दिए गए बयानों और वैश्विक तनावों ने भी बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है। निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे डॉलर मजबूत हो रहा है और उभरते देशों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ रहा है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार और रुपये दोनों पर देखा जा रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
रुपये की कमजोरी के पीछे विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बड़ी वजह मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्च से अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से अरबों डॉलर निकाले हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर होता चला गया। शेयर बाजार में भी इसका असर दिखाई दे रहा है, जहां सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
रुपये के कमजोर होने का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल, गैस, इलेक्ट्रॉनिक्स और विदेशों से आने वाले कई सामान महंगे हो सकते हैं। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका है। हालांकि आईटी और फार्मा जैसी कंपनियों को फायदा हो सकता है, क्योंकि उनकी कमाई डॉलर में होती है।
RBI और सरकार की नजर बाजार पर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार बाजार पर नजर बनाए हुए है। खबरों के मुताबिक RBI डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश कर रहा है ताकि गिरावट बहुत तेज न हो। वहीं सरकार ने विदेशी मुद्रा के बहाव को रोकने के लिए सोना-चांदी के आयात पर सख्ती जैसे कदम भी उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में तेल की कीमतें और वैश्विक हालात रुपये की दिशा तय करेंगे।
