10 जून को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बीएसई सेंसेक्स 64.42 अंकों की बढ़त के साथ 73,983.18 के स्तर पर बंद हुआ। प्रतिशत के हिसाब से यह बढ़त 0.087 फीसदी रही। बाजार ने दिन की शुरुआत मजबूती के साथ की थी, लेकिन बाद में मुनाफावसूली के कारण अधिकांश बढ़त सीमित हो गई।
शुरुआती तेजी के बाद धीमी हुई रफ्तार
कारोबार के शुरुआती घंटों में सेंसेक्स 300 अंकों से अधिक चढ़ गया था और निफ्टी भी 23,300 के करीब पहुंच गया था। हालांकि दिन चढ़ने के साथ निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार की तेजी कुछ कम हो गई। इसके बावजूद सेंसेक्स हरे निशान में बंद होने में सफल रहा।
बैंकिंग शेयरों ने दिया सहारा
बाजार को सबसे ज्यादा समर्थन बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों से मिला। बैंकिंग सेक्टर में खरीदारी के चलते प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। निवेशकों का रुझान बड़े और मजबूत शेयरों की ओर अधिक दिखाई दिया, जिससे बाजार को गिरावट से बचाने में मदद मिली।
छोटे और मिडकैप शेयरों में दबाव
जहां सेंसेक्स और निफ्टी मामूली बढ़त के साथ बंद हुए, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। कई छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में बिकवाली दर्ज की गई। इससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल जोखिम वाले निवेश से दूरी बना रहे हैं।
वैश्विक संकेतों पर बाजार की नजर
विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजारों की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक घटनाक्रम निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रहे हैं। मध्य पूर्व के घटनाक्रम और वैश्विक आर्थिक संकेतों के कारण निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, महंगाई से जुड़े आंकड़े और वैश्विक बाजारों का प्रदर्शन भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल सेंसेक्स का 73,900 के ऊपर बने रहना निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, लेकिन बाजार में अभी भी सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
