तीन महीने से अधिक समय तक चले तनाव और बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता होने की खबर का असर वैश्विक कमोडिटी बाजारों पर दिखाई दिया। समझौते के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, वहीं सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी की कीमतों में भी भारी कमजोरी देखने को मिली। निवेशकों का रुझान जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर बढ़ने से कीमती धातुओं पर दबाव बना।
MCX पर सोना हुआ सस्ता
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमतों में शुरुआती कारोबार के दौरान तेज गिरावट दर्ज की गई। पिछले कारोबारी सत्र में 5 अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1,53,879 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। गुरुवार सुबह यह 1,52,306 रुपये पर खुला। कारोबार के दौरान सोना करीब 1,716 रुपये तक टूटकर 1,52,163 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। सुबह के समय यह लगभग 1.10 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।
चांदी में भी भारी कमजोरी
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। MCX पर 3 जुलाई डिलीवरी वाली चांदी पिछले सत्र में 2,51,807 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। नए कारोबारी दिन की शुरुआत 2,48,000 रुपये पर हुई। शुरुआती कारोबार में चांदी का भाव करीब 6,300 रुपये गिरकर 2,45,509 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। सुबह के कारोबार में यह 5,374 रुपये की कमजोरी के साथ 2,46,433 रुपये के आसपास कारोबार कर रही थी।
निवेशकों की रणनीति में बदलाव
विशेषज्ञों का मानना है कि जब वैश्विक तनाव कम होता है तो निवेशक सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश साधनों से पैसा निकालकर शेयर बाजार और अन्य जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। अमेरिका-ईरान समझौते की खबर ने बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं की मांग पर पड़ा।
प्रमुख शहरों में सोने के ताजा भाव
देश के प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में नरमी देखी गई। दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,51,250 रुपये प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट सोना 1,38,650 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,13,470 रुपये के स्तर पर रहा। वहीं मुंबई और कोलकाता में 24 कैरेट सोने का भाव 1,51,100 रुपये, 22 कैरेट सोना 1,38,500 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,13,320 रुपये दर्ज किया गया।
बाजार की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर
कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक वैश्विक आर्थिक घटनाओं, डॉलर की चाल, ब्याज दरों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है।
