पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने धार्मिक बेअदबी से जुड़े पुराने मामलों को लेकर अकाली दल और कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि 1986 की नकोदर घटना और 2015 में बरगारी तथा बहबल कलां में हुई घटनाएं पंजाब के इतिहास के संवेदनशील अध्याय हैं। चीमा ने आरोप लगाया कि इन मामलों में समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
अकाली दल पर लगाए आरोप
हरपाल चीमा ने कहा कि अकाली दल बादल के शासनकाल के दौरान कई गंभीर घटनाएं सामने आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि 2015 से 2017 के दौरान सत्ता में रहने के बावजूद तत्कालीन सरकार ने बेअदबी मामलों में अपेक्षित कदम नहीं उठाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि संबंधित जांच रिपोर्टों पर भी पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
वित्त मंत्री ने कांग्रेस पार्टी को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के बाद भी इन मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनके अनुसार, विभिन्न जांचों के बावजूद दोषियों के खिलाफ अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए, जिससे लोगों में निराशा पैदा हुई।
सख्त कानून का किया जिक्र
चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने धार्मिक बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीर है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना चाहती है।
मुख्यमंत्री को बदनाम करने की साजिश का आरोप
हरपाल चीमा ने आरोप लगाया कि बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून की चर्चा शुरू होने के बाद से मुख्यमंत्री भगवंत मान को बदनाम करने की कोशिशें तेज हुई हैं। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल सरकार की छवि खराब करने के लिए विभिन्न तरह के आरोप और विवाद खड़े कर रहे हैं।
