क्या E20 पेट्रोल पुरानी गाड़ियों के लिए जोखिम है? जानिए किन हिस्सों पर पड़ सकता है असर
देशभर में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाए जाने के बाद E20 पेट्रोल चर्चा का विषय बना हुआ है। सरकार इसे प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में बड़ा कदम मानती है। वहीं दूसरी ओर कई वाहन मालिकों और मैकेनिकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या E20 पेट्रोल पुरानी गाड़ियों के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है। ऑटो विशेषज्ञों का कहना है कि नई E20-कंपैटिबल गाड़ियों में आमतौर पर ऐसी समस्या नहीं होती, लेकिन पुरानी या E20 के लिए डिजाइन न की गई गाड़ियों में कुछ पार्ट्स प्रभावित हो सकते हैं।
रबर होज और फ्यूल पाइप्स पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल में ऐसे गुण होते हैं जो समय के साथ पुराने रबर और कुछ प्लास्टिक पार्ट्स को सख्त या कमजोर बना सकते हैं। पुरानी गाड़ियों में लगे रबर होज और फ्यूल पाइप लगातार E20 पेट्रोल के संपर्क में रहने पर चटक सकते हैं या उनमें लीकेज की संभावना बढ़ सकती है। यदि समय पर इनकी जांच न की जाए तो यह सुरक्षा के लिहाज से भी जोखिम पैदा कर सकता है।
फ्यूल पंप और इंजेक्टर भी हो सकते हैं प्रभावित
एथेनॉल हवा से नमी को तेजी से सोखता है। यदि फ्यूल सिस्टम में पानी की मात्रा बढ़ती है तो धातु वाले हिस्सों में जंग लगने का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर फ्यूल पंप और फ्यूल इंजेक्टर पर पड़ सकता है। इंजेक्टर जाम होने पर इंजन तक ईंधन की सही मात्रा नहीं पहुंचती, जिससे गाड़ी झटके मार सकती है, स्टार्ट होने में परेशानी आ सकती है और इंजन का प्रदर्शन भी प्रभावित हो सकता है।
फ्यूल फिल्टर जल्दी हो सकता है चोक
ऑटो विशेषज्ञ बताते हैं कि एथेनॉल एक अच्छा सॉल्वेंट होता है। यह फ्यूल टैंक के अंदर लंबे समय से जमा गंदगी को ढीला कर देता है। यही कण फ्यूल फिल्टर में जमा होकर उसे जल्दी ब्लॉक कर सकते हैं। इसके अलावा इंजन के कुछ हिस्सों पर कार्बन जमा होने से पिकअप और माइलेज पर भी असर पड़ सकता है।
किन वाहन मालिकों को बरतनी चाहिए सावधानी?
ऑटोमोबाइल रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक E20-कंपैटिबल वाहनों में इस ईंधन के उपयोग को लेकर बड़ी समस्या सामने नहीं आई है। हालांकि E10 के लिए डिजाइन किए गए पुराने वाहनों, खासकर कुछ टर्बोचार्ज्ड इंजन और पुराने फ्यूल सिस्टम वाले मॉडलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वाहन मालिकों को अपनी कार के ओनर मैनुअल में दिए गए ईंधन संबंधी निर्देशों का पालन करना चाहिए और समय-समय पर फ्यूल सिस्टम की जांच कराते रहना चाहिए।
