जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल बढ़ते तापमान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव लोगों की नींद पर भी साफ दिखाई देने लगा है। एक नई वैश्विक स्टडी में सामने आया है कि भारत के कई बड़े शहरों में बढ़ते रात के तापमान की वजह से लोगों की नींद हर साल काफी कम हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्म रातों में शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता, जिससे नींद की गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है।
कुछ शहरों में 90 घंटे तक कम हो रही नींद
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कई महानगरों में रहने वाले लोग हर साल 80 से 90 घंटे तक की नींद खो रहे हैं। सबसे अधिक प्रभावित शहरों में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई शामिल हैं। इनमें कोलकाता देश के सबसे अधिक प्रभावित शहरों में से एक है, जहां बढ़ते रात के तापमान के कारण लोगों की लगभग 80 घंटे की नींद प्रभावित हो रही है।
रात का बढ़ता तापमान बना मुख्य वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, दिन की तुलना में रात का तापमान पहले की अपेक्षा तेजी से बढ़ रहा है। शहरों में कंक्रीट की इमारतें, कम हरियाली, अधिक ट्रैफिक और ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव के कारण रात में भी गर्मी बनी रहती है। ऐसे माहौल में शरीर का तापमान सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच पाता, जिससे गहरी और आरामदायक नींद लेना मुश्किल हो जाता है।
स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा असर
डॉक्टरों का कहना है कि लगातार नींद पूरी न होने से थकान, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। लंबे समय तक खराब नींद रहने पर हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए बढ़ती गर्मी केवल मौसम का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनती जा रही है।
जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौती
अध्ययन में कहा गया है कि यदि वैश्विक तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो आने वाले वर्षों में गर्म रातों की संख्या और बढ़ सकती है। इसका असर लोगों की दिनचर्या, कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाना, बेहतर शहरी नियोजन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के उपाय अपनाना भविष्य के लिए बेहद जरूरी होगा।
