अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सख्त कदम उठाना शुरू कर दिया है। ट्रस्ट ने आरोपियों से कथित रूप से गबन की गई रकम की वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कार्रवाई उस समय हो रही है जब विशेष जांच दल (SIT) इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है और सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं।
SIT जांच में सामने आईं कई कमियां
SIT की जांच में दान संग्रह और उसकी गिनती से जुड़ी प्रक्रिया में कई स्तरों पर लापरवाही और सुरक्षा में चूक सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, दान की सुरक्षा और निगरानी के लिए तय मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया, जिससे कथित गड़बड़ी की संभावना बनी। जांच एजेंसी ने इन कमियों को दूर करने के लिए कई सुधारात्मक सुझाव भी दिए हैं।
आरोपियों की संपत्तियों और खातों की जांच जारी
जांच एजेंसियां मामले में गिरफ्तार आरोपियों और उनसे जुड़े लोगों के बैंक खातों, लेनदेन और संपत्तियों की जांच कर रही हैं। पहले की कार्रवाई में नकदी, आभूषण और एक लग्जरी कार भी बरामद की गई थी। जांच का उद्देश्य कथित रूप से गबन की गई पूरी राशि का पता लगाना और उसकी रिकवरी सुनिश्चित करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी मांगी जांच रिपोर्ट
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की SIT से जांच की प्रगति रिपोर्ट तलब की है और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी नोटिस जारी किया है। अदालत ने जांच दल की संरचना और अब तक हुई कार्रवाई का विवरण भी मांगा है।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बदले गए नियम
घटना के बाद राम मंदिर ट्रस्ट ने दान गिनने और उसकी निगरानी की प्रक्रिया को और सख्त बना दिया है। अब कर्मचारियों के लिए कड़े सुरक्षा नियम, डिजिटल ट्रैकिंग, QR आधारित पहचान पत्र और निगरानी व्यवस्था लागू की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और श्रद्धालुओं का भरोसा मजबूत बना रहे।
