पंजाब के स्कूल शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने विधानसभा में कहा कि राज्य ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने बताया कि नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026 में पंजाब ने केरल को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी स्कूलों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है और अब शिक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।
2022 में स्कूलों की हालत थी चिंताजनक
हरजोत बैंस ने कहा कि जब उन्होंने जुलाई 2022 में शिक्षा मंत्री का पद संभाला था, तब सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहद खराब थी। करीब 8,000 स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, 3,200 स्कूलों में उपयोग योग्य शौचालय नहीं थे और लगभग 4 लाख विद्यार्थी जमीन पर चटाइयों पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर थे। कई स्कूलों में किताबें भी शैक्षणिक सत्र शुरू होने के कई महीने बाद पहुंचती थीं, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती थी।
अब समय पर पहुंचती हैं किताबें और बेहतर हुआ ढांचा
शिक्षा मंत्री ने बताया कि अब सरकारी स्कूलों में पाठ्यपुस्तकें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों में पहुंच जाती हैं और 31 मार्च तक विद्यार्थियों में वितरित कर दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के 19,125 सरकारी स्कूलों में 2,638 करोड़ रुपये से बुनियादी ढांचे का विकास किया गया है। इसके अलावा शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए विश्व बैंक से 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी भी मिली है।
‘मिशन समरथ’ से बदली पढ़ाई की तस्वीर
हरजोत बैंस ने बताया कि सरकार का ‘मिशन समरथ’ देश के सबसे बड़े बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में शामिल हो चुका है। इस योजना के तहत बच्चों को केवल कक्षा के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार समूहों में पढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों को पढ़ने, लिखने और गणित में कठिनाई थी, उन्हें अलग तरीके से पढ़ाकर बेहतर बनाया गया। आज इस कार्यक्रम का लाभ हर साल लगभग 12 लाख विद्यार्थी और 70 हजार से अधिक शिक्षक उठा रहे हैं।
नीट में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने बढ़ाया मान
शिक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2021 में सरकारी स्कूलों के केवल 80 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की थी, जबकि वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 882 हो गई है। उन्होंने इसे ‘पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस (PACE)’ कार्यक्रम की सफलता बताया। मजीठा के सरकारी स्कूल के 6 और दीनानगर के 17 विद्यार्थियों के नीट पास करने का भी उन्होंने विशेष उल्लेख किया। साथ ही हरनूरप्रीत कौर का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने अपनी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 3140 हासिल कर सरकारी स्कूलों का नाम रोशन किया।
सरकारी स्कूलों में नई पहल और आधुनिक शिक्षा
हरजोत बैंस ने कहा कि पंजाब देश का पहला राज्य बन गया है, जहां पहली से 12वीं कक्षा तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को मुख्य विषय के रूप में शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में कई स्कूल ऑफ एमिनेंस विकसित किए गए हैं, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है। लुधियाना के शहीद सुखदेव थापर स्कूल ऑफ एमिनेंस का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इस स्कूल के विकास पर 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और यहां के 17 विद्यार्थियों ने इस वर्ष नीट परीक्षा पास की है।
दाखिले के आंकड़ों और विपक्ष के आरोपों पर जवाब
शिक्षा मंत्री ने सरकारी स्कूलों में घटते दाखिले को लेकर कहा कि यह केवल पंजाब की समस्या नहीं है, बल्कि कोविड-19 के बाद पूरे देश में ऐसा रुझान देखने को मिला है। उन्होंने बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कई राज्यों में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घटी है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की अपार आईडी व्यवस्था लागू होने से अब विद्यार्थियों का सही रिकॉर्ड तैयार हो रहा है और दोहराए गए दाखिलों की समस्या खत्म हो रही है। साथ ही उन्होंने विपक्ष से सरकारी स्कूलों की उपलब्धियों को राजनीति से ऊपर उठकर देखने की अपील की।
