देश में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में संसद में ऐसा कानूनी प्रावधान लाया गया है, जिससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जा सकता है। फिलहाल किसी तरह का शुल्क लागू नहीं किया गया है, लेकिन इस संभावना को लेकर राजनीतिक दलों, व्यापारिक संगठनों और डिजिटल भुगतान से जुड़े विशेषज्ञों के बीच बहस शुरू हो गई है।
कांग्रेस और व्यापारिक संगठनों ने जताई चिंता
UPI पर संभावित MDR शुल्क को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कुछ व्यापारिक संगठनों ने भी आशंका जताई है कि अगर कारोबारियों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ बढ़ता है, तो इसका असर डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल पर पड़ सकता है। एक हालिया सर्वे में भी दावा किया गया है कि शुल्क लागू होने की स्थिति में UPI के उपयोग में बड़ी गिरावट आ सकती है।
अशनीर ग्रोवर ने क्या कहा?
भारतपे के पूर्व सह-संस्थापक अशनीर ग्रोवर ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि UPI भारत की सबसे सफल डिजिटल सेवाओं में से एक है और इस पर MDR लागू करना पीछे की ओर उठाया गया कदम होगा। उनके मुताबिक, अगर इस तरह का शुल्क लागू किया गया तो डिजिटल भुगतान की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सरकार से इस विषय पर दोबारा विचार करने की अपील की।
वित्त मंत्री ने दी स्थिति स्पष्ट
इस पूरे विवाद के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल UPI लेनदेन पर कोई MDR लागू नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में ऐसा कोई निर्णय लिया जाता है, तो उसका भुगतान ग्राहक नहीं बल्कि व्यापारी करेंगे। यानी आम उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
विधेयक में क्या है प्रावधान?
लोकसभा से पारित टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (संशोधन) विधेयक, 2026 में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन किया गया है। इस बदलाव के तहत सरकार को भविष्य में अधिसूचना जारी कर वर्तमान शून्य-MDR व्यवस्था में बदलाव करने का कानूनी अधिकार मिलेगा। इसका मतलब यह नहीं है कि अभी UPI पर कोई शुल्क लागू हो गया है, बल्कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर सरकार के पास ऐसा करने का कानूनी विकल्प रहेगा।
