पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना उन परिवारों के लिए राहत का जरिया बन रही है, जिनके लिए महंगा इलाज कराना आसान नहीं था। योजना के तहत पात्र परिवारों को सालाना 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका फायदा सरकारी और योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में लिया जा सकता है।
जेब से पैसे खर्च किए बिना इलाज
किसी परिवार में गंभीर बीमारी आने पर इलाज का खर्च सबसे बड़ी चिंता बन जाता है। इस योजना का मकसद इसी आर्थिक दबाव को कम करना है। हाल के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 की शुरुआत तक करीब 2.91 लाख लाभार्थियों को योजना के तहत इलाज मिल चुका था और कैशलेस उपचार की कुल कीमत लगभग 1,044 करोड़ रुपये रही।
घुटने से लेकर दिल और डायलिसिस तक इलाज
योजना के तहत कई महंगे और जरूरी उपचार शामिल हैं। इनमें डायलिसिस, घुटने का रिप्लेसमेंट, पित्त की थैली की सर्जरी, सी-सेक्शन, हृदय संबंधी उपचार और किडनी स्टोन का इलाज जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। केवल 10 प्रमुख प्रक्रियाओं के तहत ही 2.44 लाख से ज्यादा कैशलेस उपचार किए जा चुके हैं, जिनकी लागत ₹316.50 करोड़ से अधिक बताई गई है।
कैंसर मरीजों को भी मिल रही मदद
कैंसर जैसे गंभीर रोग के इलाज में लंबे समय तक बड़ी रकम खर्च हो सकती है। जुलाई 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत 8,069 कैंसर मरीजों को कैशलेस उपचार दिया गया और इस पर ₹20.22 करोड़ खर्च हुए।
जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत
योजना का असर उन परिवारों में खास तौर पर दिखाई देता है, जहां इलाज के लिए बड़ी रकम जुटाना मुश्किल होता है। पटियाला जिले के एक मैकेनिक को भी योजना के तहत कैशलेस इलाज मिला, जिससे परिवार को करीब ₹90,000 के संभावित अस्पताल खर्च से राहत मिली।
गांवों तक पहुंच रहा स्वास्थ्य लाभ
योजना के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के परिवारों को स्वास्थ्य सुविधा से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। जून 2026 तक 47.27 लाख स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके थे और 835 अस्पताल योजना से जुड़े थे। सरकार की ओर से ई-कार्ड डाउनलोड करने और योजना तक पहुंच आसान बनाने के लिए डिजिटल सुविधाओं को भी बढ़ाने की बात कही गई थी।
