पंजाब सरकार ने स्कूली शिक्षा में पिछले साढ़े चार साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड पेश किया है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि सरकार ने सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर करीब 2,300 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सरकार का दावा है कि इस निवेश से स्कूलों में क्लासरूम, लैब, शौचालय, फर्नीचर, इंटरनेट और दूसरी जरूरी सुविधाओं में बड़ा बदलाव आया है।
9 हजार से ज्यादा क्लासरूम और 13,920 शौचालय
शिक्षा मंत्री के अनुसार पंजाब के सरकारी स्कूलों में 9,000 से ज्यादा नए क्लासरूम और लैब बनाए गए हैं। विद्यार्थियों के लिए 13,920 नए शौचालय तैयार किए गए हैं। सरकार का कहना है कि अब राज्य के हर सरकारी स्कूल में उपयोग योग्य शौचालय उपलब्ध है। इसके अलावा बच्चों को फर्श पर बैठने से बचाने के लिए करीब 2 लाख बेंच उपलब्ध करवाए गए हैं।
स्मार्ट क्लासरूम से कंप्यूटर लैब तक
पंजाब के सरकारी स्कूलों में तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है। सरकार के अनुसार 10,000 से अधिक इंटरैक्टिव पैनल लगाए गए हैं। वहीं 5,012 सरकारी स्कूलों को एडवांस्ड कंप्यूटर लैब से जोड़ा गया है। राज्य के सरकारी स्कूलों में वाई-फाई सुविधा उपलब्ध कराने का भी दावा किया गया है। स्कूलों की चारदीवारी को लेकर भी काम हुआ है और सरकार के अनुसार 99.9 प्रतिशत स्कूलों में चारदीवारी मौजूद है।
निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में पहुंचे लाखों बच्चे
सरकारी स्कूलों में बढ़ते दाखिलों को सरकार अपने काम का बड़ा परिणाम बता रही है। शिक्षा मंत्री के अनुसार 2022 से अब तक 3.64 लाख विद्यार्थी निजी स्कूलों से निकलकर सरकारी स्कूलों में दाखिल हुए हैं। सरकार इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था में लोगों के बढ़ते भरोसे का संकेत मानती है।
जेईई और नीट में भी बढ़ी सफलता
सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रदर्शन का भी जिक्र किया गया। सरकार के अनुसार पिछले चार वर्षों में सरकारी स्कूलों के 786 विद्यार्थियों ने जेईई और 2,166 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है। नीट-यूजी में सरकारी स्कूलों से सफल विद्यार्थियों की संख्या 2021 में 80 थी, जो 2026 में बढ़कर 882 हो गई। जेईई मेन्स में 361 और जेईई एडवांस्ड में 64 विद्यार्थियों के सफल होने की जानकारी दी गई।
पहली से 12वीं तक एआई पढ़ाने वाला पहला राज्य
शिक्षा में नई तकनीक को शामिल करने के मामले में पंजाब ने एक और बड़ा कदम उठाने का दावा किया है। सरकार के अनुसार पंजाब पहली से 12वीं कक्षा तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को मुख्य विषय के रूप में लागू करने वाला पहला राज्य बना है। इसके साथ ही बिजनेस ब्लास्टर्स कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को कारोबार का व्यावहारिक अनुभव देने की कोशिश की गई है। इस कार्यक्रम में करीब 2.30 लाख विद्यार्थी शामिल हुए और सरकार ने सीड मनी के रूप में 29 करोड़ रुपये दिए।
शिक्षकों को विदेश और प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रशिक्षण
शिक्षकों की ट्रेनिंग पर भी सरकार ने विशेष ध्यान देने की बात कही है। अलग-अलग बैचों में प्रिंसिपलों को सिंगापुर, प्राथमिक शिक्षकों को फिनलैंड और मुख्य अध्यापकों को आईआईएम अहमदाबाद में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया। सरकार का उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों और बेहतर स्कूल प्रबंधन के लिए तैयार करना बताया गया।
खेल सुविधाओं से लेकर सुरक्षा तक
सरकारी स्कूलों में खेल सुविधाओं का विस्तार भी किया गया है। कुछ स्कूलों में स्विमिंग पूल, शूटिंग रेंज, बास्केटबॉल और टेनिस कोर्ट, कबड्डी मैट तथा कुश्ती और बॉक्सिंग रिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में पूर्व सैनिकों को कैंपस मैनेजर के रूप में तैनात करने और बड़े स्कूलों में सुरक्षा गार्ड लगाने की जानकारी भी दी गई।
फीस और परिवहन में राहत
निजी स्कूलों की फीस को लेकर भी सरकार ने वार्षिक फीस वृद्धि को अधिकतम 5 प्रतिशत तक सीमित करने की बात कही है। वहीं सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए मुफ्त बस सेवा शुरू की गई है, जिससे सैकड़ों स्कूलों के 15,000 से अधिक विद्यार्थी रोजाना लाभ उठा रहे हैं।
बाढ़ के बाद भी स्कूलों की मरम्मत जारी
2023 और 2025 की बाढ़ से पंजाब के कई जिलों के हजारों स्कूल प्रभावित हुए। सरकार के अनुसार बुरी तरह क्षतिग्रस्त 500 स्कूलों की मरम्मत विश्व बैंक के सहयोग से की जा रही है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि आने वाले दो वर्षों में पंजाब के सरकारी स्कूलों को ऐसी स्थिति में लाने का लक्ष्य है, जहां स्कूलों में जरूरी सुविधाओं की कमी न रहे।
