श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की ओर से बुलाए जाने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान का पहला बयान सामने आया है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब का आदेश हर सिख के लिए सबसे ऊंचा होता है। उन्होंने कहा कि किसी भी पद या जिम्मेदारी से ऊपर सिख मर्यादा और अकाल तख्त का हुक्म है, जिसे मानना हर सिख का कर्तव्य है।
विनम्र सिख के रूप में होंगे पेश
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि वह वहां मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि एक साधारण और विनम्र सिख के रूप में पेश होंगे। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि “दास नंगे पैर चलने वाला एक सिख बनकर अकाल तख्त साहिब के सामने हाजिर होगा।” उनका कहना था कि सिख परंपरा में अकाल तख्त साहिब सर्वोच्च धार्मिक स्थान है और उसके आदेश को सिर माथे पर लिया जाता है।
राष्ट्रपति से भी जताया खेद
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह देश की माननीय राष्ट्रपति से भी क्षमा चाहते हैं। उन्होंने बताया कि 15 जनवरी को अमृतसर की गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में एक अहम कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति के आने का कार्यक्रम तय है, लेकिन अकाल तख्त साहिब का आदेश उनके लिए सबसे पहले है। उन्होंने कहा कि अकाल तख्त का हुक्म पहले था, आज भी है और हमेशा सबसे ऊंचा रहेगा।
सिख मर्यादा को बताया सर्वोपरि
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दोहराया कि सत्ता, पद और कार्यक्रम बाद में आते हैं, जबकि सिख धर्म की मर्यादा सबसे पहले है। उन्होंने कहा कि अकाल तख्त साहिब की परंपरा और सम्मान को बनाए रखना हर सिख की जिम्मेदारी है।
पंजाब में संदेश साफ
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद पंजाब की राजनीति और सिख समाज में यह संदेश गया है कि मान सरकार सिख परंपराओं और धार्मिक संस्थाओं के सम्मान को सर्वोपरि मानती है। उनके इस रुख को विनम्रता और श्रद्धा का प्रतीक माना जा रहा है।
