नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के पांच दिन बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। बाढ़ की चपेट में आने से अब तक 788 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2,500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। कई परिवार लगातार अपने रिश्तेदारों की तलाश कर रहे हैं।
मलबे में बदल गए कई इलाके
बाढ़ ने नदियों के आसपास बसे कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। तेज बहाव के साथ आए पानी, कीचड़ और मलबे ने घरों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचाया। त्रिशूली नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ने से बचाव दलों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
पुल टूटने से 400 परिवार प्रभावित
गोरखा जिले के घ्यालचोक इलाके में त्रिशूली नदी के तेज बहाव ने एक महत्वपूर्ण पुल को बहा दिया। यह पुल करीब 400 परिवारों को मुख्य सड़क से जोड़ता था। पुल टूटने के बाद लोगों के आने-जाने के साथ किसानों को दूध और सब्जियां बाजार तक पहुंचाने में भी परेशानी हो रही है। इससे पहले भी बाढ़ में एक अन्य पुल बह गया था।
अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार की मजबूरी
बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं, लेकिन कई की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना मुश्किल होने के कारण अधिकारियों ने पहचान और जरूरी जांच के बाद कुछ अज्ञात शवों का अस्थायी रूप से सामूहिक दफन शुरू किया है। DNA नमूने भी सुरक्षित किए जा रहे हैं, ताकि आगे चलकर पहचान होने पर परिवारों को जानकारी दी जा सके।
9500 से ज्यादा लोगों को बचाया गया
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण के अनुसार अब तक करीब 9,500 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। राहत और बचाव दल उन इलाकों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जहां सड़कें और पुल टूटने के कारण संपर्क मुश्किल हो गया है। हेलीकॉप्टरों और सुरक्षा बलों की मदद से प्रभावित लोगों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।
सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश
सबसे मुश्किल अभियान हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में चल रहा है। रसुवा इलाके में निर्माणाधीन अपर त्रिशूली-1 परियोजना की सुरंग में 100 से ज्यादा लोगों के फंसे होने की आशंका है। भारी कीचड़ और मलबे के कारण सुरंग के भीतर पहुंचना बेहद कठिन है। नेपाल की सेना और अन्य सुरक्षा बल लगातार रास्ता साफ करने में जुटे हैं।
भारत की टीम भी रेस्क्यू में शामिल
सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के अभियान में भारत ने भी विशेषज्ञ टीम भेजी है। डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और टनल रेस्क्यू विशेषज्ञों की टीम ने प्रभावित स्थानों का निरीक्षण किया है। भारत की ओर से राहत सामग्री और बचाव उपकरणों की कई खेप भी नेपाल भेजी गई हैं। इनमें सुरंग बचाव उपकरण, फोरेंसिक सामग्री, दवाएं, कंबल, तिरपाल और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं।
