भारत में 2026 का मानसून अब चिंता बढ़ाने लगा है। जून से शुरू हुए मानसून सीजन में देशभर में बारिश सामान्य से करीब 13-14 फीसदी कम रही है। कई राज्यों में स्थिति ज्यादा गंभीर है। बिहार में बारिश की कमी करीब 42 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 40 फीसदी और पंजाब में 34 फीसदी तक दर्ज की गई है। महाराष्ट्र में भी बारिश का घाटा बहुत ज्यादा रहा है।
अल नीनो ने बढ़ाई परेशानी
कमजोर मानसून के पीछे अल नीनो को बड़ी वजह माना जा रहा है। अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में समुद्र का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया के मौसम पर पड़ता है और भारत में मानसूनी हवाएं कमजोर हो सकती हैं।
इस साल जून में बारिश की स्थिति बेहद खराब रही। जुलाई में कुछ सुधार हुआ, लेकिन अगस्त में फिर बारिश कमजोर पड़ गई। मौसम विभाग ने पहले ही इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया था।
किसानों पर सीधा असर
भारत की खेती का बड़ा हिस्सा मानसून की बारिश पर निर्भर है। कम बारिश का असर धान, मक्का, दाल, तिलहन और कपास जैसी खरीफ फसलों पर पड़ रहा है। इस साल खरीफ फसलों का कुल रकबा पिछले साल के मुकाबले करीब 1.5-2 फीसदी कम बताया गया है। मक्के की बुवाई में भी गिरावट आई है।
बारिश की कमी के कारण जिन खेतों में फसल बोई जा चुकी है, वहां भी चिंता बनी हुई है। अगले कुछ हफ्तों में पर्याप्त पानी नहीं मिला तो पैदावार प्रभावित हो सकती है। किसानों को सिंचाई के लिए ट्यूबवेल और दूसरे साधनों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे खेती की लागत बढ़ सकती है।
जलाशयों में घटता पानी
कम बारिश का असर पानी के भंडार पर भी दिखाई दे रहा है। खासकर उत्तर भारत के जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में कम है। इसका असर खेती के साथ-साथ शहरों की पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
आम लोगों की जेब पर असर
कम फसल का सबसे बड़ा असर खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है। अगर उत्पादन घटता है और बाजार में किसी खाद्य वस्तु की उपलब्धता कम होती है, तो उसकी कीमत बढ़ने की संभावना रहती है। इससे खाद्य महंगाई बढ़ सकती है। विशेषज्ञों ने कमजोर मानसून की स्थिति में खाद्यान्न उत्पादन में गिरावट का भी अनुमान जताया है।
अर्थव्यवस्था पर भी दबाव
मानसून का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहता। ग्रामीण आय कम होने पर गांवों में खरीदारी घट सकती है। इसका असर छोटे कारोबार, उपभोक्ता सामान और ग्रामीण बाजारों पर पड़ सकता है। वहीं खाद्य कीमतें बढ़ने से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिससे ब्याज दरों और कर्ज की लागत पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है।
सितंबर की बारिश पर टिकी नजर
मानसून का सीजन अभी सितंबर तक जारी रहता है। इसलिए आने वाला महीना बेहद महत्वपूर्ण है। अच्छी बारिश होने पर कुछ फसलों को राहत मिल सकती है, जबकि बारिश कमजोर रहने पर फसल उत्पादन, पानी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर दबाव और बढ़ सकता है।
