21 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है और उससे पहले विपक्षी दलों ने एक बार फिर केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति पर काम तेज कर दिया है। इसी कड़ी में शनिवार को इंडिया गठबंधन की अहम वर्चुअल मीटिंग हुई, जिसमें 24 दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई और तय किया गया कि संसद में विपक्ष एकजुट होकर सरकार से जवाब मांगेगा।
किन मुद्दों पर बनी सहमति?
मीटिंग में पहलगाम आतंकी हमला, ऑपरेशन सिंदूर और अमेरिका से जुड़ा ‘नमस्ते ट्रंप’ मामला प्रमुख मुद्दे रहे। नेताओं ने कहा कि इन मामलों में सेना के शौर्य को सलाम करते हुए, सरकार से जवाबदेही तय की जाए।
सभी दलों की राय थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इन मुद्दों पर सदन में खुद जवाब देना चाहिए, न कि कोई और मंत्री।
सोनिया-राहुल की मौजूदगी
बैठक सोनिया गांधी के नेतृत्व के नाम पर बुलाई गई थी। हालांकि, उन्होंने कोई बयान नहीं दिया। उनके साथ राहुल गांधी भी जुड़े, जिन्होंने विपक्ष को आगाह किया कि अगर एकता नहीं दिखाई गई तो इसका सीधा फायदा सरकार को होगा।
राहुल ने सुझाव दिया कि संसद में सवाल पूछने से पहले विपक्ष को मुद्दों की प्राथमिकता तय करनी चाहिए और संगठित तरीके से सरकार से जवाब मांगना चाहिए।
AAP की गैरहाज़िरी पर चुप्पी
दिलचस्प बात यह रही कि इस मीटिंग में आम आदमी पार्टी (AAP) मौजूद नहीं थी और न ही उनकी अनुपस्थिति पर कोई चर्चा हुई। यह भी साफ नहीं हो सका कि AAP को बुलाया गया था या नहीं।
शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पहलगाम हमले को लेकर सरकार की नाकामी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “यह इंटेलिजेंस की बड़ी चूक है और अब तक हमलावर आतंकी पकड़े नहीं गए हैं। इसपर संसद में बहस होनी चाहिए।”
तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि “सरकार विपक्ष को डराने-धमकाने के लिए ईडी का इस्तेमाल कर रही है और इलेक्शन कमीशन SIR जैसे हथकंडों से वोटबंदी करने की कोशिश हो रही है।”
उन्होंने पेगासस जासूसी कांड का मुद्दा भी उठाया।
बैठक के दौरान लेफ्ट नेता डी राजा ने राहुल गांधी के उस बयान पर अप्रत्यक्ष रूप से आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने केरल में लेफ्ट और आरएसएस को एक जैसा बताया था। डी राजा ने कहा कि, “इंडिया ब्लॉक के वरिष्ठ नेताओं को ऐसे बयान नहीं देने चाहिए, जिससे कार्यकर्ताओं में भ्रम पैदा हो और एकता पर असर पड़े। आरएसएस की तुलना लेफ्ट से करना सरासर गलत है।”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक के अंत में कहा कि जिन मुद्दों पर सहमति बनी है, उन्हें फाइनल कर दिया गया है। अब संसद में इन सभी मुद्दों को एकजुट होकर जोरदार ढंग से उठाया जाएगा।
