भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ी व्यापारिक डील (Trade Deal) अंतिम चरण में पहुंच गई है। आने वाले 48 घंटों में इसका आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है। यह समझौता ऐसे समय पर हो रहा है जब अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए पारस्परिक टैरिफ (Reciprocal Tariff) की डेडलाइन 9 जुलाई को खत्म होने जा रही है।
क्या है ट्रेड डील का मामला?
दरअसल, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत कई देशों पर टैरिफ लगाए थे। भारत पर 26% टैरिफ लगाया गया था, जिसे बाद में 90 दिनों के लिए टाल दिया गया। अब ये अवधि 9 जुलाई को खत्म हो रही है। इससे पहले दोनों देश एक स्थायी समझौते पर काम कर रहे हैं ताकि आगे व्यापार में बाधाएं न आएं।
किन बातों पर अड़ा है भारत?
इस व्यापार समझौते में सबसे बड़ा मुद्दा कृषि और डेयरी सेक्टर को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि भारत इन क्षेत्रों को अपने लिए पूरी तरह से खोल दे ताकि अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत में बेचे जा सकें। लेकिन भारत सरकार, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, इस मांग को ठुकरा चुकी है।
भारत का मानना है कि अगर अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पाद खुले बाजार में आते हैं, तो भारतीय किसानों और छोटे उत्पादकों को नुकसान हो सकता है। भारत ने अमेरिका को यह भी बताया है कि कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर 100% तक का टैरिफ इसलिए लगाया गया है ताकि भारतीय किसानों को उचित दाम मिल सके।
भारत की क्या है मांग?
भारत ने बदले में अमेरिका से कहा है कि वह भारतीय श्रम प्रधान उद्योगों जैसे वस्त्र, चमड़ा, हस्तशिल्प आदि को अमेरिकी बाजार में अधिक पहुंच दे। भारत चाहता है कि छोटे उद्योगों को अमेरिका में व्यापार का मौका मिले ताकि रोजगार के अवसर बढ़ें और निर्यात में सुधार हो।
सरकार का क्या कहना है?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी हाल ही में इस डील को लेकर बयान दिया। उन्होंने साफ किया कि भारत अमेरिका के साथ एक बड़ा लेकिन संतुलित समझौता करना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी डील में कृषि और डेयरी सेक्टर पर गहराई से विचार ज़रूरी है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच जल्द ही एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौता हो सकता है। उन्होंने संकेत दिया था कि 8 जुलाई तक इसपर तस्वीर साफ हो जाएगी। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के संबंध मजबूत हैं और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और गहरे होंगे।
भारत और अमेरिका के बीच यह ट्रेड डील दोनों देशों के लिए एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है। हालांकि कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं, लेकिन बातचीत आखिरी दौर में है और जल्द ही इसका समाधान निकलने की उम्मीद है। 9 जुलाई की डेडलाइन से पहले इस समझौते पर मुहर लगने की पूरी संभावना है। यह डील न सिर्फ भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को मजबूती देगी, बल्कि दोनों देशों के निवेशकों और उद्योगों के लिए नए मौके भी खोलेगी।
