अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के एक बड़े फैसले ने दुनियाभर के शेयर बाजारों में जबरदस्त तेजी ला दी। ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में चल रहे “Project Freedom” ऑपरेशन को फिलहाल रोकने का ऐलान किया, जिसके बाद निवेशकों ने राहत की सांस ली। इसका असर एशिया से लेकर अमेरिका तक के बाजारों में देखने को मिला और कई देशों के शेयर सूचकांक तेजी से ऊपर चढ़ गए।
क्या है Project Freedom?
“Project Freedom” अमेरिका का एक सैन्य अभियान था, जिसका मकसद होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना था। हाल के महीनों में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के कारण इस इलाके में तेल सप्लाई प्रभावित हो रही थी। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल दुनिया के कई देशों तक पहुंचता है।
ट्रंप ने कहा कि फिलहाल इस ऑपरेशन को रोककर बातचीत और समझौते का रास्ता अपनाया जाएगा। हालांकि अमेरिकी निगरानी और दबाव जारी रहेगा। इस बयान के बाद बाजारों में उम्मीद जगी कि अब हालात और ज्यादा खराब नहीं होंगे।
एशियाई बाजारों में जबरदस्त तेजी
ट्रंप के फैसले के बाद एशियाई शेयर बाजारों में शानदार उछाल देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 5 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ गया और पहली बार 7000 के स्तर के पार पहुंचा। जापान के बाजार में भी तेजी रही और टेक कंपनियों के शेयरों में बड़ी खरीदारी हुई।
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को डर था कि अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता तो तेल की कीमतें बहुत ऊपर चली जातीं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता। लेकिन ट्रंप के “Pause” वाले फैसले ने फिलहाल उस डर को कम कर दिया।
अमेरिकी बाजार भी रिकॉर्ड स्तर पर
सिर्फ एशिया ही नहीं, बल्कि अमेरिकी बाजारों में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली। S&P 500 और Nasdaq जैसे प्रमुख इंडेक्स रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए। खासतौर पर AI और टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में भारी खरीदारी हुई। AMD जैसी कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला।
विश्लेषकों के मुताबिक निवेशकों को लग रहा है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो जाता है तो वैश्विक बाजारों में स्थिरता लौट सकती है। इसी उम्मीद में बड़ी संख्या में निवेशकों ने शेयर खरीदे।
तेल की कीमतों में राहत
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव कम होने की उम्मीद के चलते कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। Brent Crude और WTI दोनों नीचे आए। इससे दुनिया के कई देशों को राहत मिलने की उम्मीद है क्योंकि तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ जाती है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ती है, तो तेल बाजार और शेयर बाजार दोनों में स्थिरता बनी रह सकती है। फिलहाल निवेशक ट्रंप और ईरान की अगली रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं।
