पंजाब में आई बाढ़ ने हजारों परिवारों की ज़िंदगी को प्रभावित किया। इस मुश्किल घड़ी में मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने राहत और बचाव कार्यों में तेजी दिखाते हुए लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की है। सरकार का कहना है कि यह सिर्फ मदद नहीं, बल्कि जनता के साथ खड़े होने का वादा है।
गांव-गांव पहुंचा स्वास्थ्य अभियान
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 2,303 गांवों में विशेष स्वास्थ्य अभियान शुरू किया गया है। इनमें से 2,016 गांवों में हेल्थ कैंप आयोजित हो चुके हैं। इन कैंपों में करीब 51,612 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और वहीं पर इलाज व ज़रूरी दवाइयाँ दी गईं।
घर-घर स्वास्थ्य जांच
बाढ़ से प्रभावित इलाकों में सरकार ने आशा वर्कर्स की मदद से घर-घर जाकर लोगों की सेहत की जांच करवाई। अब तक 1,929 गांवों में लगभग 1,32,322 परिवारों तक यह सेवा पहुंच चुकी है। ज़रूरतमंदों को ओआरएस, पैरासिटामोल, डेटॉल, क्रीम, बैंड-एड और अन्य दवाइयों वाली मेडिकल किट्स दी गईं। लोगों का कहना है कि इस बार सरकार ने सिर्फ घोषणा नहीं की, बल्कि सच में दरवाजे-दरवाजे पहुंचकर मदद दी।
बीमारियों की रोकथाम के उपाय
बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चुनौती बीमारियों को रोकना है। इसके लिए सरकार ने तेज़ी से कदम उठाए हैं।
- 1,861 गांवों में मच्छरों के प्रजनन स्थलों की जांच हुई।
- लगभग 1,08,770 घरों की स्क्रीनिंग की गई।
- इनमें से 2,163 घरों में मच्छरों के लार्वा पाए गए, जिन पर तुरंत कार्रवाई करते हुए 23,630 घरों में लार्वीसाइड का छिड़काव किया गया।
- इसके अलावा, 878 गांवों में फॉगिंग कराई गई ताकि डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों पर काबू पाया जा सके।
लोगों की प्रतिक्रिया
गांवों के लोग कह रहे हैं कि यह पहली बार हुआ है जब सरकार खुद उनके दरवाजे पर आई है। न किसी को अपील करनी पड़ी, न कोई सिफारिश करनी पड़ी। लोग इसे सरकार की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का प्रतीक मान रहे हैं। एक ग्रामीण ने कहा, “पहली बार लग रहा है कि सरकार हमें परिवार समझकर मदद कर रही है।”
मुख्यमंत्री भगवंत मान की पहल
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकार का मकसद सिर्फ आंकड़े गिनाना नहीं, बल्कि जनता के दिल में भरोसा पैदा करना है। उनका कहना है कि जब नीयत साफ हो और टीम मिलकर काम करे, तो मुश्किल हालात में भी उम्मीद की किरण जगाई जा सकती है।
पंजाब सरकार का यह अभियान अब सिर्फ एक राहत कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह ‘अपनी सरकार, सच्ची सेवा’ की मिसाल बन गया है। बाढ़ से प्रभावित लोग मानते हैं कि इस बार उन्हें केवल सहायता ही नहीं मिली, बल्कि यह भरोसा भी मिला कि संकट की घड़ी में सरकार उनके साथ ख
