एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर चिंता है कि यह नौकरियों और बच्चों के भविष्य के लिए चुनौती बन सकता है, लेकिन दूसरी तरफ यही AI आज लाखों लोगों की ज़िंदगी बचाने में अहम भूमिका निभा रहा है। महाराष्ट्र में इसका बड़ा उदाहरण सामने आया है, जहां AI की मदद से 1040 महिलाओं में गर्भाशय (सर्वाइकल) कैंसर का समय रहते पता लगाया गया। डॉक्टरों का कहना है कि बीमारी शुरुआती चरण में पकड़ में आ गई, इसलिए इन महिलाओं के पूरी तरह स्वस्थ होने की उम्मीद बहुत ज़्यादा है।
डॉक्टरों की दुनिया में AI की बढ़ती मौजूदगी
आज AI सिर्फ मशीन नहीं, बल्कि डॉक्टरों का एक मजबूत सहायक बन चुका है। साल 2025 के एक मेडिकल सर्वे के मुताबिक, 66% डॉक्टर अब AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि 2023 में यह आंकड़ा सिर्फ 38% था। करीब 68% डॉक्टरों का मानना है कि AI से मरीजों की देखभाल पहले से बेहतर हुई है। इसकी बड़ी वजह यह है कि दुनिया भर में डॉक्टरों की कमी है, मरीजों की संख्या बढ़ रही है और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं।
बीमारी का जल्दी पता लगाना
AI का सबसे बड़ा फायदा है बीमारियों की शुरुआती पहचान। CT स्कैन, MRI और मैमोग्राफी जैसी जांचों में AI इतनी बारीकी से तस्वीरें पढ़ लेता है कि छोटी-छोटी गड़बड़ियां भी पकड़ में आ जाती हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि AI ने ब्रेस्ट कैंसर की जांच में गलत नतीजों को काफी हद तक कम किया है। फेफड़ों के कैंसर में भी छोटे ट्यूमर बहुत अधिक सटीकता से पहचाने जा रहे हैं। शुरुआती स्टेज में कैंसर पकड़ में आ जाए, तो इलाज की सफलता 90% से ज्यादा होती है।
हर मरीज के लिए अलग इलाज
AI अब इलाज को पर्सनलाइज्ड बना रहा है। मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, जीन और लाइफस्टाइल को देखकर यह तय किया जाता है कि कौन-सी दवा या थेरेपी उसके लिए बेहतर रहेगी। इससे कीमोथेरेपी या सर्जरी के साइड इफेक्ट्स कम होते हैं और इलाज ज्यादा असरदार व सस्ता बनता है।
दवाओं की खोज में तेजी
पहले नई दवा बनाने में सालों लग जाते थे, लेकिन AI ने इस प्रक्रिया को तेज कर दिया है। प्रोटीन स्ट्रक्चर की पहचान से अब नई दवाएं हफ्तों या महीनों में डिजाइन हो रही हैं। हेल्थकेयर सेक्टर में AI का बाजार तेज़ी से बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में इसमें कई गुना इजाफा होने की उम्मीद है।
पहले ही खतरे का अलर्ट
AI प्रिवेंटिव केयर में भी क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। यह मरीज के डेटा से पहले ही बता देता है कि उसे डायबिटीज, हार्ट अटैक या किसी और गंभीर बीमारी का खतरा है या नहीं। इससे समय रहते इलाज शुरू हो जाता है और जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है।
महाराष्ट्र और पंजाब के उदाहरण
महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में संजीवनी मिशन के तहत हजारों महिलाओं की स्क्रीनिंग हुई। AI आधारित पैप स्मीयर और इमेजिंग से प्री-कैंसर स्टेज पकड़ ली गई, जिससे कैंसर बनने से पहले ही इलाज संभव हो गया।
वहीं पंजाब में भी 2025 में AI-इनेबल्ड डिवाइसेस लॉन्च हुए, जैसे सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए रेडिएशन-फ्री स्मार्ट स्कोप।
चुनौतियां और आगे की राह
हालांकि AI के साथ डेटा प्राइवेसी और बायस जैसी चुनौतियां भी हैं, लेकिन नए नियम और कानून इन्हें संभालने की कोशिश कर रहे हैं। कुल मिलाकर, AI अगर सही तरीके से इस्तेमाल हो, तो यह डर नहीं बल्कि सेहत के लिए एक बड़ा वरदान साबित हो रहा है।
