पंजाब सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों के हित में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जानकारी दी कि राज्य के 51 विभागों में कार्यरत 65,048 आउटसोर्स कर्मचारियों को नए सुधारों के दायरे में लाया जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य कर्मचारियों के शोषण को रोकना और उन्हें अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी कार्य व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
ठेकेदारों की भूमिका होगी खत्म
सरकार के नए फैसले के बाद कर्मचारियों को ठेकेदारों और बिचौलियों के माध्यम से काम नहीं करना पड़ेगा। कर्मचारियों को सीधे सरकार के अधीन लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन और अन्य लाभों में पारदर्शिता आएगी तथा ठेका प्रथा से जुड़ी कई समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है।
दो श्रेणियों में बांटे गए कर्मचारी
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए दो अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं। इनमें खतरनाक कार्य करने वाले कर्मचारी और गैर-खतरनाक कार्य करने वाले कर्मचारी शामिल हैं। सरकार ने दोनों श्रेणियों के लिए अलग-अलग पात्रता अवधि निर्धारित की है।
खतरनाक श्रेणी के कर्मचारियों को विशेष लाभ
खतरनाक श्रेणी में आने वाले कर्मचारियों को विशेष राहत दी गई है। इसमें PSPCL के लाइनमैन, सीवरेज अनब्लॉकर और अग्निशमन विभाग के कई कर्मचारी शामिल हैं। ऐसे कर्मचारी लगातार 3 साल की सेवा पूरी करने के बाद सीधे सरकारी अनुबंध के अधीन आने के पात्र होंगे। पहले इस प्रक्रिया में अधिक समय लगता था।
गैर-खतरनाक श्रेणी के लिए 5 साल की शर्त
गैर-खतरनाक श्रेणी के कर्मचारियों को 5 साल की सेवा पूरी करने के बाद सरकारी अनुबंध के तहत लाया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे कर्मचारियों को भविष्य में अधिक स्थिरता और सुरक्षा मिलेगी।
वेतन सीधे बैंक खातों में पहुंचेगा
नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों का वेतन सीधे उनके बैंक खातों में जमा किया जाएगा। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और कर्मचारियों को समय पर पूरा वेतन मिलने में सुविधा होगी।
