पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर नरेगा (मनरेगा) को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि केंद्र ने इस योजना का फॉर्मेट बदलकर इसे धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश शुरू कर दी है। उनका आरोप है कि देश के इतिहास में पहली बार किसी सरकारी योजना का नाम धर्म के आधार पर रखने का प्रयास किया गया, जो सीधे तौर पर संविधान की भावना के खिलाफ है।
स्टैंडिंग कमेटी की सिफारिशों की अनदेखी
हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि सप्तगिरी शंकर उलाका की अध्यक्षता वाली रूरल डेवलपमेंट और पंचायती राज से जुड़ी स्टैंडिंग कमेटी (2024–25) की रिपोर्ट में कहीं भी नरेगा का नाम बदलने की सिफारिश नहीं की गई थी। इसके उलट, कमेटी ने मजदूरों के हित में काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 150 करने की सलाह दी थी। लेकिन केंद्र सरकार ने इसे सिर्फ 125 दिन तक सीमित कर दिया और उस पर भी कई सख्त शर्तें लागू कर दीं।
डिजिटल शर्तों से बढ़ी मजदूरों की मुश्किल
चीमा ने कहा कि अब मजदूरों के लिए डिजिटल अटेंडेंस और मोबाइल लोकेशन अनिवार्य कर दी गई है। यह शर्तें उन गरीब, अनपढ़ और तकनीक से दूर मजदूरों के लिए बड़ी परेशानी बन रही हैं, जिनके लिए नरेगा शुरू की गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जिनके पास स्मार्टफोन या नेटवर्क की सुविधा नहीं है, वे इन नियमों का पालन कैसे करेंगे।
राज्यों पर 40% बोझ, फेडरल ढांचे पर चोट
वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अब नरेगा के खर्च में राज्यों से 40 प्रतिशत हिस्सेदारी मांग रही है। उनके मुताबिक, यह देश के फेडरल स्ट्रक्चर और राज्यों की अर्थव्यवस्था पर सीधा हमला है। पहले यह योजना पूरी तरह केंद्र प्रायोजित थी, जिससे गरीबों को कानूनी गारंटी के साथ रोजगार मिलता था।
गरीबों के हक पर डाका
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि 2005 में शुरू हुई इस योजना की कानूनी गारंटी अब धीरे-धीरे खत्म की जा रही है। बकाया भुगतान रोका जा रहा है, जिससे मजदूर आर्थिक तंगी में फंस रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार ने गरीबों के हक पर यह “डाका” बंद नहीं किया और बकाया राशि तुरंत जारी नहीं की, तो इसके गंभीर सामाजिक परिणाम हो सकते हैं।
केंद्र से फैसले पर पुनर्विचार की मांग
अंत में चीमा ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह नरेगा को कमजोर करने के बजाय इसे मजबूत करे, स्टैंडिंग कमेटी की सिफारिशें लागू करे और मजदूरों को उनका हक दिलाए, ताकि देश के सबसे कमजोर वर्ग को राहत मिल सके।
