पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि भारत निर्वाचन आयोग को वोटर लिस्टों की विशेष जांच प्रक्रिया (Special Intensive Revision) को लेकर पैदा हुई शंकाओं को साफ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई राजनीतिक पार्टियां इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रही हैं, इसलिए आयोग को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि जनता का लोकतंत्र में भरोसा और मजबूत हो।
चुनाव आयोग से पारदर्शिता की अपील
पत्रकारों से बातचीत के दौरान CM मान ने कहा कि आयोग की कार्यवाही ऐसी नहीं दिखनी चाहिए जिससे यह लगे कि लोकतंत्र की आवाज़ को दबाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग को “मूक दर्शक” बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि सभी विपक्षी दलों की आपत्तियों का जवाब देना चाहिए।
मुख्यमंत्री के अनुसार, चुनाव आयोग का यह दायित्व है कि वह सभी दलों की चिंताओं को दूर करे ताकि पारदर्शिता और जनविश्वास कायम रहे।
बाढ़ राहत फंड पर केंद्र से नाराज़गी
CM मान ने कहा कि बाढ़ की तबाही के बावजूद केंद्र सरकार ने पंजाब के साथ “सौतेला व्यवहार” किया है। प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1600 करोड़ रुपये की राहत राशि अभी तक नहीं मिली है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र इन पैसों को अन्य योजनाओं के फंड से “एडजस्ट” करने की कोशिश कर रहा है। मान ने कहा कि “पंजाब देश का अन्न भंडार और तलवार भुजा है, केंद्र को उसके साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए।”
PM से मुलाकात की इच्छा, पर ‘बिहार चुनाव’ में व्यस्त
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रधानमंत्री से मिलने की कोशिश की ताकि बाढ़ और अन्य मुद्दों पर बात हो सके, साथ ही वे उन्हें गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस समारोह में आमंत्रित करना चाहते हैं।
मान ने कहा कि “अगर प्रधानमंत्री बिहार में चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, तो मैं खुद वहां जाकर उन्हें पंजाब के मुद्दे बताने को तैयार हूं।”
