पंजाब में बाढ़ को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भाजपा नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति से बचना चाहिए। मान ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ को चुनौती देते हुए कहा कि किसी भी बयान से पहले उन्हें अपना “होमवर्क” करना चाहिए।
“झूठ बोलकर लोगों को गुमराह कर रहे भाजपा नेता” – मान
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि जनता द्वारा नकारे जा चुके नेता अब अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए बेतुके बयान दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं द्वारा दिए जा रहे बयान हाईकमान के इशारों पर तैयार किए जाते हैं। मान ने साफ किया कि बाढ़ जैसे गंभीर मसलों पर बयानबाज़ी से पहले तथ्यों की जांच ज़रूरी है, क्योंकि इससे लोगों की भावनाएँ आहत होती हैं।
जाखड़ का पलटवार: “बाढ़ का जिम्मा आप सरकार पर”
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य की आप सरकार को बाढ़ का जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि पंजाब सरकार ने माधोपुर हेडवर्क्स की सुरक्षा जांच का ठेका एक “अनुभवहीन कंपनी” को दे दिया, जिसके चलते भारी तबाही हुई।
जाखड़ ने यह भी मांग की कि बाढ़ की पूरी जांच किसी सेवानिवृत्त जज की अगुवाई में करवाई जाए, ताकि सच सामने आ सके।
जाखड़ ने आगे कहा कि सोशल मीडिया पर यह झूठ फैलाया जा रहा है कि बाढ़ के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है। भाजपा ने इस संबंध में चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत भी दी है, ताकि “फेक न्यूज” फैलाने वालों का पता लगाया जा सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि असल में बाढ़ का पानी पंजाब सरकार के नियंत्रण वाले रंजीत सागर डैम से छोड़ा गया था। सवाल उठाते हुए जाखड़ ने कहा कि जब पानी माधोपुर हेडवर्क्स की ओर बढ़ रहा था, तो पहले से सूचना क्यों नहीं दी गई और समय पर गेट क्यों नहीं खोले गए?
बाढ़ पर राजनीति या जनता की चिंता?
एक ओर भाजपा राज्य सरकार पर लापरवाही का आरोप लगा रही है, वहीं मुख्यमंत्री मान का कहना है कि विपक्ष केवल सियासत कर रहा है। दोनों तरफ़ से आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर जारी है, लेकिन बाढ़ से प्रभावित लोगों को अब भी राहत और मदद की सबसे अधिक ज़रूरत है।
