ईरान-इजरायल तनाव के बीच दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग Strait of Hormuz को लेकर स्थिति लगातार उलझती जा रही है। ईरान ने पहले इस रास्ते को “पूरी तरह खुला” बताया, लेकिन कुछ ही समय बाद फिर से सख्ती बढ़ा दी। इस विरोधाभासी स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और तेल व्यापारियों में भारी भ्रम पैदा हो गया है।
भारतीय टैंकरों ने बदला रास्ता
इस अनिश्चितता का असर भारत पर भी पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई भारतीय तेल टैंकर—जैसे सनमार हेराल्ड, देश गरिमा, देश वैभव और देश विभोर—होर्मुज की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन बीच रास्ते से ही यू-टर्न लेकर वापस लौट गए। इनके साथ कुछ ग्रीक टैंकर भी इस मार्ग को पार नहीं कर सके।
करोड़ों बैरल तेल फंसा
इन टैंकरों में करीब 8.3 मिलियन बैरल कच्चा तेल भरा हुआ था। अगर ये जहाज होर्मुज पार कर लेते, तो यह हाल के समय में खाड़ी क्षेत्र से तेल की सबसे बड़ी आवाजाही होती। लेकिन सुरक्षा चिंताओं और स्पष्ट निर्देशों की कमी के कारण जहाजों को वापस लौटना पड़ा।
ईरान की शर्तें और चेतावनी
ईरान ने साफ किया है कि होर्मुज से गुजरने के लिए सभी जहाजों को उसकी सेना, खासकर IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) से अनुमति लेनी होगी। साथ ही, यह भी कहा गया है कि अगर अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता, तो यह रास्ता फिर से बंद किया जा सकता है।
सुरक्षा खतरे से बढ़ी चिंता
हालात इतने संवेदनशील हैं कि कुछ जहाजों को रेडियो के जरिए चेतावनी दी गई और कुछ मामलों में फायरिंग की घटनाएं भी सामने आई हैं। इससे जहाज मालिकों और क्रू की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है, जिसके चलते कई जहाजों ने जोखिम लेने से इनकार कर दिया।
वैश्विक तेल व्यापार पर असर
Strait of Hormuz दुनिया के करीब 20% तेल के ट्रांसपोर्ट का मुख्य रास्ता है। ऐसे में यहां की अस्थिरता का असर सीधे वैश्विक बाजार पर पड़ रहा है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
भारत के लिए क्यों अहम है मामला
भारत जैसे देश, जो बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं, इस स्थिति से सीधे प्रभावित होते हैं। टैंकरों के यू-टर्न लेने से सप्लाई में देरी हो सकती है और इसका असर देश की ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों पर पड़ सकता है।
