पंजाब इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में है। नदियों और बांधों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे हालात गंभीर हो गए हैं। कई जिलों में खेत डूब चुके हैं और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है। सरकार की सबसे बड़ी चुनौती बांधों की सुरक्षा और प्रभावित क्षेत्रों को राहत पहुंचाने की है।
पंजाब ने हरियाणा से की अतिरिक्त पानी लेने की अपील
22 अगस्त को पंजाब सरकार ने हरियाणा को पत्र लिखकर भाखड़ा नहर से अधिक पानी लेने का अनुरोध किया था। पंजाब की दलील थी कि मौजूदा समय में खेतों को अतिरिक्त पानी की ज़रूरत नहीं है, इसलिए यह पानी हरियाणा की नहरों में भेजकर बांधों पर दबाव कम किया जा सकता है। साथ ही यह कदम पाकिस्तान की ओर अनावश्यक पानी जाने से भी रोक सकता है।
बीबीएमबी ने भी दी थी सिफारिश
भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) ने भी जलस्तर को देखते हुए हरियाणा से अधिक पानी लेने की सिफारिश की थी। अधिकारियों का मानना था कि अगर हरियाणा अतिरिक्त पानी लेता है तो बांध की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और बाढ़ से हो रहा नुकसान कुछ हद तक कम किया जा सकेगा।
हरियाणा का देर से आया जवाब
पंजाब की इस अपील पर हरियाणा ने एक सप्ताह तक कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन अब, जब पंजाब बाढ़ से जूझ रहा है, हरियाणा ने उलटा अपनी मांग बदल दी है। राज्य सरकार ने पहले 7,900 क्यूसेक पानी का इंडेंट दिया था, जिसे अब घटाकर 6,250 क्यूसेक करने को कहा है। जबकि इस समय भाखड़ा नहर में करीब 8,894 क्यूसेक पानी बह रहा है।
पंजाब के खेतों में सिंचाई बंद
पंजाब ने बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अपने खेतों में पानी का उपयोग बंद कर दिया है। ऐसे में अतिरिक्त पानी अपने आप हरियाणा की ओर जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हालात में दोनों राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है, वरना बांधों पर खतरा और बढ़ सकता है।
राजनीति और संवेदनशीलता का मुद्दा
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर बाढ़ से हुई तबाही पर मदद का आश्वासन दिया है। लेकिन पानी के बंटवारे पर उनका नया रुख दोनों राज्यों के बीच खींचतान को उजागर करता है। बाढ़ जैसी आपदा में जब सहयोग और संवेदनशीलता की सबसे अधिक ज़रूरत है, तब पानी को लेकर यह विवाद राजनीतिक रंग भी लेता दिख रहा है।
