भारतीय शेयर बाजार इन दिनों भारी दबाव में है। वजह है अमेरिका की ओर से लगाया गया अतिरिक्त टैरिफ, जिसने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। पिछले दो कारोबारी दिनों में ही निवेशकों को करीब 9.7 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
गुरुवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स लगभग 706 अंक गिरकर 80,080 पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी करीब 211 अंक टूटकर 24,500 के आसपास आ गया। इस तरह दो दिनों में सेंसेक्स कुल 1,555 अंक यानी करीब 1.9% गिर चुका है।
टैरिफ का झटका क्यों?
अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 25% का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया है। पहले से मौजूद शुल्क को मिलाकर अब भारतीय सामानों पर अमेरिका में कुल टैक्स 50% हो गया है। इसका सीधा असर भारतीय कंपनियों के निर्यात पर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल सतर्क हो गए हैं और शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ गई है।
किन कंपनियों पर असर ज्यादा?
सेंसेक्स की बड़ी कंपनियों में से एचसीएल टेक, इन्फोसिस, पावर ग्रिड, टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर और आईसीआईसीआई बैंक जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली।
हालांकि, कुछ कंपनियों जैसे टाइटन, मारुति, लार्सन एंड टुब्रो और एक्सिस बैंक में थोड़ी बढ़त भी देखने को मिली, जिसने बाजार को और नीचे गिरने से बचाया।
विदेशी निवेशकों का पलायन
टैरिफ के दबाव के साथ-साथ विदेशी निवेशक भी भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। यह पूंजी निकासी (FII Outflow) निवेशकों के भरोसे को कमजोर कर रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी फंड के लगातार बाहर जाने से आने वाले दिनों में भी बाजार अस्थिर रह सकता है।
सरकार का कदम
इस बीच, सरकार ने कपड़ा उद्योग को राहत देने की कोशिश की है। कपड़ा निर्यातकों को सहारा देने के लिए कपास के आयात पर शुल्क-मुक्त छूट को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे निर्यातकों को अमेरिकी टैरिफ के दबाव से कुछ हद तक राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों का मूड अभी बेहद नाजुक है। जब तक अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ विवाद का हल नहीं निकलता, तब तक शेयर बाजार में उथल-पुथल बनी रह सकती है।
जियोजीत फाइनेंशियल के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि अमेरिकी शुल्क से पैदा हुई निराशा ने बाजार पर गहरा असर डाला है। वहीं, लेमन मार्केट्स के विश्लेषक गौरव गर्ग का मानना है कि चौतरफा बिकवाली की वजह से गिरावट और तेज हुई है।
फिलहाल बाजार निवेशकों के भरोसे और अंतरराष्ट्रीय हालात पर निर्भर करेगा। अगर विदेशी पूंजी का बहाव वापस नहीं आया और अमेरिका-भारत के बीच व्यापारिक तनाव बना रहा, तो आने वाले दिनों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
