
पंजाब में वन्यजीवों और प्रकृति के प्रति विद्यार्थियों की बढ़ती रुचि का एक शानदार उदाहरण सामने आया है। छत्तबीड़ चिड़ियाघर, जिसे आधिकारिक रूप से महिंदर चौधरी जूलॉजिकल पार्क के नाम से जाना जाता है, हाल के महीनों में विद्यार्थियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 22 अप्रैल, 2024 से 18 जनवरी, 2025 के बीच 939 सरकारी और 403 निजी स्कूलों के विद्यार्थियों ने चिड़ियाघर का दौरा किया। इस दौरान 50,294 सरकारी स्कूलों और 39,876 निजी स्कूलों के छात्र वन्यजीवों को करीब से देखने और उनके बारे में सीखने पहुंचे।
स्टूडेंट जू क्लब – बच्चों की जिज्ञासा को मिला नया मंच
छात्रों की इस बढ़ती रुचि के पीछे स्टूडेंट जू क्लब की भूमिका अहम रही है। इस क्लब के तहत विद्यार्थियों को न केवल वन्यजीवों के बारे में जानकारी दी जाती है, बल्कि उनके संरक्षण और पर्यावरण के महत्व को भी समझाया जाता है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार लगातार शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नए कदम उठा रही है। वन एवं वन्यजीव संरक्षण मंत्री लाल चंद कटारूचक की अगुवाई में इस दिशा में कई योजनाएं चलाई गईं, जिनका सीधा असर विद्यार्थियों की जागरूकता पर पड़ा है।
छत्तबीड़ चिड़ियाघर – बच्चों के लिए एक जीवंत कक्षा
विद्यार्थियों के लिए चिड़ियाघर किसी खुले विज्ञान प्रयोगशाला से कम नहीं। किताबों में पढ़ी हुई बातें जब वे अपनी आंखों से देख पाते हैं, तो उनका ज्ञान और भी गहरा हो जाता है। यहां कई तरह के दुर्लभ पशु-पक्षी मौजूद हैं, जैसे बंगाल टाइगर, सफेद बाघ, शेर, तेंदुआ, भालू, हिरण और विभिन्न प्रजातियों के पक्षी।
चिड़ियाघर का दौरा बच्चों के लिए रोचक और ज्ञानवर्धक होता है, क्योंकि वे न केवल वन्यजीवों को देख सकते हैं, बल्कि उनके व्यवहार, रहन-सहन और संरक्षण के तरीकों को भी समझते हैं।
सरकार की पहल और जागरूकता अभियान
पंजाब सरकार द्वारा वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इनमें विद्यार्थियों को नि:शुल्क या रियायती दरों पर चिड़ियाघर का दौरा कराने, विशेष कार्यशालाएं आयोजित करने और इंटरएक्टिव सेशंस कराने जैसी योजनाएं शामिल हैं।
इस तरह के प्रयासों से बच्चों में प्रकृति के प्रति लगाव और जागरूकता बढ़ती है। वे समझते हैं कि वन्यजीव भी हमारी प्रकृति का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें बचाना हमारी जिम्मेदारी है।
विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या – सकारात्मक संकेत
छत्तबीड़ चिड़ियाघर में विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि नई पीढ़ी अब पर्यावरण और वन्यजीवों को लेकर अधिक संवेदनशील हो रही है। यह न केवल एक अच्छी शैक्षिक पहल है, बल्कि इससे समाज में जागरूकता भी बढ़ रही है।
अगर यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में पंजाब के बच्चे न केवल वन्यजीवों के प्रति जागरूक बनेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे।