अमेरिका के श्रम विभाग (US Department of Labor) ने सोशल मीडिया पर जारी एक नए विज्ञापन में कंपनियों पर H-1B वीज़ा प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल करने और अमेरिकी नौजवानों की नौकरियां विदेशी कर्मचारियों को देने का आरोप लगाया है।
51 सेकंड के इस वीडियो में भारत को इस वीज़ा सिस्टम का सबसे बड़ा लाभार्थी देश बताया गया है।
अमेरिकी ड्रीम छिन गया: लेबर डिपार्टमेंट का दावा
लेबर डिपार्टमेंट ने अपनी X पोस्ट में लिखा,
“H-1B वीज़ा के बेतहाशा दुरुपयोग ने अमेरिकी नौजवानों से उनका ‘अमेरिकन ड्रीम’ छीन लिया है, क्योंकि उनकी नौकरियां अब विदेशियों को मिल रही हैं।”
विभाग ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और श्रम मंत्री लॉरी चावेज़-डीरीमर की अगुवाई में अब इस सिस्टम को सुधारने का समय आ गया है।
उनके मुताबिक, “हम अब कंपनियों को जवाबदेह बना रहे हैं और अमेरिकी लोगों के लिए ‘अमेरिकन ड्रीम’ वापस ला रहे हैं।”
‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’ के तहत शुरू हुई सख्त कार्रवाई
यह पूरा अभियान “प्रोजेक्ट फायरवॉल” के तहत चलाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत सितंबर 2025 में हुई थी।
इस प्रोजेक्ट का मकसद है —
“कंपनियों को तकनीकी और इंजीनियरिंग नौकरियों में सस्ते विदेशी प्रोफेशनल्स को भर्ती करने से रोकना।”
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि इस योजना के तहत H-1B वीज़ा का गलत इस्तेमाल करने वाली कंपनियों का ऑडिट किया जाएगा।
जो कंपनियां कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को रखती हैं या अमेरिकी स्टाफ को निकालती हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
वीडियो में भारत पर सीधा इशारा
विज्ञापन में 1950 के दशक के ‘अमेरिकन ड्रीम’ की झलक दिखाई गई है, जिसकी तुलना आज की स्थिति से की गई है।
वीडियो में दावा किया गया है कि —
“H-1B वीज़ा के 72% अप्रूवल भारतीय नागरिकों को मिलते हैं।”
इसके साथ यह संदेश दिया गया है कि ट्रंप प्रशासन अब अमेरिकी युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर तैयार कर रहा है और कंपनियों को अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता देने के लिए बाध्य करेगा।
‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडा फिर से चर्चा में
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विज्ञापन ट्रंप सरकार के दूसरे कार्यकाल के “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडा का हिस्सा है।
इस एजेंडे के तहत प्रशासन अमेरिकी कंपनियों पर दबाव बना रहा है कि वे विदेशी वर्कर्स की जगह देश के नागरिकों को नौकरी दें।
भारत पर बढ़ेगा असर?
भारत दुनिया में H-1B वीज़ा पाने वाला सबसे बड़ा देश है।
इस नए अभियान से भारतीय आईटी और टेक कंपनियों पर असर पड़ सकता है, जो बड़ी संख्या में कर्मचारियों को अमेरिका भेजती हैं।
अब देखना यह होगा कि ट्रंप प्रशासन की यह सख्ती अमेरिकी नौजवानों को राहत देती है या वैश्विक रोजगार बाजार में नई चुनौती खड़ी करती है।
