पंजाब विधानसभा में केंद्र सरकार द्वारा MGNREGA का नाम बदलने के फैसले के खिलाफ ज़ोरदार विरोध देखने को मिला। इस मुद्दे पर बोलते हुए कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक ने कहा कि यह योजना गांवों के गरीब और मजदूर वर्ग के लिए जीवनरेखा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का यह कदम मजदूरों के हक छीनने जैसा है।
गांव और गरीबों को मिल रहा था सीधा फायदा
मंत्री कटारूचक ने कहा कि MGNREGA से गांवों में रहने वाले लाखों लोगों को रोज़गार मिला है और उनकी आमदनी का सहारा बना है। उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ सिर्फ मजदूरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे गांवों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत हुई है। अगर इस योजना को कमजोर किया गया, तो इसका असर पूरे देश की इकॉनमी पर पड़ेगा।
दिहाड़ी बढ़ाने की थी ज़रूरत
कटारूचक ने सवाल उठाया कि जब महंगाई लगातार बढ़ रही है और खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं, तब सरकार को मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में योजना के नाम को लेकर फैसला लेना निराशाजनक है और यह मजदूरों की समस्याओं से ध्यान भटकाने जैसा है।
महिलाओं की बड़ी भागीदारी
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि MGNREGA में लगभग 75 प्रतिशत महिलाएं काम करती हैं। यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। गांवों की महिलाएं आगे बढ़कर काम कर रही हैं और अपने परिवार का सहारा बन रही हैं। ऐसे में इस योजना पर असर डालना महिलाओं की मेहनत को कमजोर करना है।
नाम नहीं, अधिकार का सवाल
लाल चंद कटारूचक ने साफ कहा कि विरोध योजना के नाम से नहीं, बल्कि मजदूरों के अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने धार्मिक उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान राम ने भी समाज के सबसे कमजोर वर्ग को सम्मान दिया था, जबकि आज BJP की केंद्र सरकार रोजगार छीनने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना को बचाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
पंजाब सरकार का संघर्ष जारी
मंत्री कटारूचक ने कहा कि यह मत समझा जाए कि विधानसभा का एक दिन का सत्र बेकार है। पंजाब के लोग अपने हक के लिए आवाज उठाना जानते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार MGNREGA को बचाने के लिए पूरी मजबूती से लड़ाई लड़ेगी और मजदूरों के अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कुल मिलाकर, MGNREGA के नाम बदलने का मुद्दा सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि मजदूरों, महिलाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा सवाल बन गया है। पंजाब सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस योजना के पक्ष में डटकर खड़ी रहेगी और केंद्र सरकार के फैसले का विरोध जारी रखेगी।
