हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के विकास को नई दिशा देने के लिए एक आधुनिक शहर बसाने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार चंडीगढ़ के बेहद पास एक नए स्टेट-ऑफ-द-आर्ट शहर का निर्माण करना चाहती है, जिसे ‘हिम चंडीगढ़’ नाम दिया गया है। यह शहर बद्दी क्षेत्र के शीतलपुर इलाके में प्रस्तावित है, लेकिन इस प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय लोगों में नाराज़गी भी बढ़ती जा रही है।
कहां और कितना बड़ा होगा शहर
मुख्यमंत्री के अनुसार ‘हिम चंडीगढ़’ करीब 20,000 बीघा जमीन पर विकसित किया जाएगा। यह स्थान चंडीगढ़ से लगभग 30 किलोमीटर दूर होगा। सरकार का दावा है कि बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण यहां से चंडीगढ़ सिर्फ 20 मिनट में पहुंचा जा सकेगा।
बेहतर कनेक्टिविटी की योजना
इस नए शहर को बद्दी-चंडीगढ़ रेल लाइन से भी जोड़ा जाएगा। इससे न सिर्फ लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी, बल्कि औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार इसे भविष्य का एक बड़ा अर्बन सेंटर बनाने की तैयारी में है।
वर्ल्ड-क्लास सुविधाओं का दावा
सरकार का कहना है कि यह टाउनशिप आधुनिक शहरी सुविधाओं से लैस होगी। यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर खास ध्यान दिया जाएगा। शहर के मास्टर प्लान और डिज़ाइन के लिए जल्द ही एक विशेषज्ञ कंसल्टेंट नियुक्त किया जाएगा।
कैबिनेट की मंजूरी
इस अहम प्रोजेक्ट को 30 दिसंबर 2025 को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई। जानकारी के मुताबिक, 3,700 बीघा जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में है, जबकि 3,400 बीघा जमीन पहले ही शहरी विकास विभाग को सौंपी जा चुकी है।
गांववालों का विरोध क्यों
जहां सरकार इसे विकास की बड़ी पहल बता रही है, वहीं मालपुर और सैंडोली पंचायत के गांवों में इसका कड़ा विरोध हो रहा है। शीतलपुर के कम्युनिटी हॉल में हुई बैठक में ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी हालत में नहीं देंगे।
किसानों की बड़ी चिंताएं
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आजीविका खेती और दूध उत्पादन पर निर्भर है। जमीन चली जाने से वे बेरोज़गार हो जाएंगे। उनका यह भी कहना है कि पहले ही रेल लाइन और फोरलेन सड़क परियोजनाओं में काफी जमीन जा चुकी है।
कानूनी लड़ाई की चेतावनी
गांववालों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर जबरन जमीन ली गई, तो वे आंदोलन करेंगे और अदालत का सहारा लेंगे।
