देश में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की लगातार बढ़ती कीमतों ने एयरलाइन कंपनियों पर भारी दबाव डाल दिया है। खासतौर पर Air India को इस बढ़ोतरी का सीधा असर झेलना पड़ रहा है। जेट फ्यूल एयरलाइंस के खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा होता है, जो कई बार कुल लागत का 40% या उससे ज्यादा तक पहुंच जाता है।
जुलाई तक उड़ानों में कटौती
बढ़ती लागत के चलते Air India ने जून और जुलाई तक अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती करने का फैसला किया है। कंपनी के अनुसार, कई रूट अब लाभदायक नहीं रह गए हैं, इसलिए शेड्यूल कम करना मजबूरी बन गया है।
रोजाना उड़ानों में कमी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Air India करीब 100 उड़ानें रोजाना कम कर सकती है, जो उसके कुल ऑपरेशन का लगभग 10% हिस्सा है। इसका असर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की फ्लाइट्स पर पड़ सकता है।
लंबी दूरी की उड़ानों पर ज्यादा असर
सबसे ज्यादा असर लंबी दूरी की उड़ानों पर देखने को मिल रहा है। यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे रूट्स पर फ्यूल की खपत ज्यादा होती है, जिससे ये रूट्स महंगे और घाटे वाले बन गए हैं।
एयरस्पेस प्रतिबंध भी वजह
जेट फ्यूल की कीमतों के अलावा, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कई एयरस्पेस बंद हैं। इससे विमानों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे फ्यूल खर्च और बढ़ गया है और संचालन और महंगा हो गया है।
एयरलाइन इंडस्ट्री पर संकट
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि एयरलाइन कंपनियों ने सरकार से मदद की मांग की है। उद्योग संगठनों का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली, तो कई कंपनियों को ऑपरेशन कम या बंद करना पड़ सकता है।
यात्रियों पर असर
उड़ानों में कटौती का असर यात्रियों पर भी पड़ेगा। टिकट महंगे हो सकते हैं और कुछ रूट्स पर फ्लाइट्स की संख्या कम होने से यात्रा विकल्प सीमित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जेट फ्यूल की कीमतों में राहत नहीं मिलती, तब तक एयरलाइंस को इसी तरह लागत कम करने के लिए उड़ानों में कटौती जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं।
