वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली छमाही निवेशकों के लिए कई मायनों में खास रही। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से घरेलू शेयर बाजार में मामूली बढ़त दर्ज हुई, लेकिन इस दौरान सोना-चांदी ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया।
शेयर बाजार का कमजोर प्रदर्शन
इस छमाही में बेंचमार्क सेंसेक्स 4.6% और निफ्टी 3.7% बढ़ा। यह बढ़त पिछले दो सालों में सबसे कमजोर मानी जा रही है। वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही में दोनों सूचकांकों में लगभग 2% की गिरावट आई थी। वहीं, इस बार निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 ने बेहतर प्रदर्शन किया और करीब 9% की तेजी दर्ज की।
सोना-चांदी ने दिया जबरदस्त रिटर्न
निवेशकों के लिए इस छमाही की सबसे बड़ी खुशखबरी सोने और चांदी से आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 22.1% और चांदी 35.8% बढ़ी। घरेलू बाजार में भी सोने की कीमतों में 29.4% और चांदी में 41.2% की जबरदस्त तेजी आई।
विशेषज्ञों के अनुसार, बीते 30 सालों में पहली बार किसी पहली छमाही में सोने ने इतना बड़ा रिटर्न दिया है।
रुपये पर दबाव
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर रहा। इस छमाही में रुपया करीब 4% टूटकर 88.8 पर पहुंच गया। रुपये की कमजोरी का असर आयात पर पड़ा और निवेशकों की नजर सोने-चांदी जैसे सुरक्षित साधनों पर ज्यादा रही।
बाजार पूंजीकरण घटा
पहली छमाही के अंत में भारतीय शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप 451.6 लाख करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले की तुलना में लगभग 23 लाख करोड़ रुपये कम है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और आईटी सेक्टर में कमजोरी ने बाजार की रफ्तार धीमी की।
सेक्टोरल परफॉर्मेंस
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ऑटो सेक्टर: वाहन कंपनियों के शेयरों ने इस दौरान अच्छा प्रदर्शन किया।
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बैंकिंग: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में भी मजबूती आई।
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मेटल सेक्टर: धातु कंपनियों ने बेहतर रिटर्न दिए।
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आईटी सेक्टर: निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 9% गिरा और इस छमाही का कमजोर सेक्टर साबित हुआ।
वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही ने साफ किया कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये की कमजोरी ने शेयर बाजार को दबाव में रखा, लेकिन सोना-चांदी निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सहारा बने। आने वाले महीनों में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, डॉलर की चाल और घरेलू आर्थिक नीतियों पर निर्भर करेगी।
