घरेलू शेयर बाजार ने गुरुवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बीच मजबूत रिकवरी दिखाई। शुरुआती गिरावट के बावजूद आखिरी घंटों में आई ताकतवर रैली ने सेंसेक्स और निफ्टी को हरे निशान पर बंद कराया। इससे लगातार तीन दिनों से चल रही गिरावट पर भी रोक लग गई।
सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूती
बीएसई सेंसेक्स 426.86 अंक यानी 0.51% बढ़कर 84,818.13 पर बंद हुआ। सेंसेक्स के 30 में से 21 शेयरों में बढ़त देखने को मिली।
उधर, एनएसई निफ्टी भी 140.55 अंक (0.55%) की तेजी के साथ 25,898.05 पर बंद हुआ। हालांकि कारोबार के बीच कुछ समय तक बिकवाली का दबाव दिखा, लेकिन निवेशकों की सकारात्मक भावनाओं और HDFC बैंक, कोटक बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज में खरीदारी ने बाजार को समर्थन दिया।
कौन-कौन से सेक्टर चमके
लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान पर रहे।
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ऑटो, मेटल, फार्मा और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा मजबूत दिखे।
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केवल तेल और गैस सेक्टर में हल्की गिरावट देखने को मिली।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व का असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने लगातार तीसरी बार ब्याज दरों में कटौती की है। नई फेड फंड रेट 3.5%–3.75% की रेंज में आ गई है, जो लगभग तीन सालों में सबसे कम है।
फेड ने संकेत दिया है कि अगले साल केवल एक और कटौती की संभावना है, लेकिन बाजार इससे पूरी तरह सहमत नहीं दिख रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी दर कटौती का वैश्विक स्तर पर बड़ा असर पड़ेगा।
भारतीय बाजार पर फेड निर्णय का सकारात्मक असर
पिछले कुछ दिनों से निवेशक फेड के फैसले का इंतजार कर रहे थे, जिसके कारण बाजार दबाव में था।
फैसला आने के बाद भारतीय बाजारों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई और गिरावट पर ब्रेक लग गया।
रुपये की कमजोरी और आगे का परिदृश्य
अर्थ भारत ग्लोबल मल्टीप्लायर फंड के फंड मैनेजर नचिकेता सावरकर के मुताबिक—
वर्तमान वैश्विक नीतिगत अनिश्चितता ने दुनिया भर में वित्तीय परिस्थितियों को कड़ा किया है।
इसका असर यह हुआ है कि—
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संपत्तियों के मूल्यांकन पर दबाव बढ़ा है
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ब्याज दरों से जुड़े सेक्टरों में अस्थिरता तेज हुई है
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन मजबूत घरेलू संकेतक और कंपनियों के अच्छे प्रदर्शन से भारतीय बाजार लंबे समय में स्थिर बने रहेंगे।
