दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz के खुलने की खबर के बाद वैश्विक बाजार में बड़ी राहत देखने को मिली। इस रास्ते से दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई होती है, इसलिए इसके बंद होने से पहले बाजार में भारी तनाव था। जैसे ही इसके खुलने की खबर आई, तेल की कीमतों में तेज गिरावट शुरू हो गई।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में 9 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड लगभग 88–90 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गया, जो हाल के ऊंचे स्तर से काफी नीचे है। यह गिरावट इस संकेत के रूप में देखी जा रही है कि बाजार में सप्लाई को लेकर डर कम हो रहा है।
ट्रंप के दावों पर विवाद
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज को पूरी तरह खोलने और भविष्य में बंद न करने पर सहमति दे दी है। लेकिन ईरान ने इन दावों को गलत बताया और कहा कि ऐसा कोई स्थायी समझौता नहीं हुआ है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ अस्थायी व्यवस्था है, जो युद्धविराम की स्थिति से जुड़ी हुई है।
अब भी बनी हुई है अनिश्चितता
हालांकि होर्मुज खुलने से बाजार में राहत जरूर मिली है, लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं है। अमेरिका की ओर से नौसैनिक नाकाबंदी अभी भी जारी है और ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो यह रास्ता फिर से बंद किया जा सकता है।
वैश्विक बाजार पर असर
तेल की कीमतों में गिरावट का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला। निवेशकों का भरोसा बढ़ा और कई देशों के बाजार में तेजी आई। कम तेल कीमतें महंगाई को कम करने में मदद कर सकती हैं, जिससे कई अर्थव्यवस्थाओं को राहत मिल सकती है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह खबर
भारत जैसे देशों के लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है। तेल सस्ता होने से देश का आयात बिल कम होगा और महंगाई पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। इससे आम लोगों और उद्योगों दोनों को फायदा मिल सकता है।
