पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट कॉलेजियम ने न्यायिक नियुक्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। कॉलेजियम ने सर्वसम्मति से पंजाब और हरियाणा बार से जुड़े 7 वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नाम हाईकोर्ट जज के पद के लिए केंद्र सरकार को भेजने की सिफारिश की है। इस फैसले को न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
गहन जांच के बाद बनी सहमति
कॉलेजियम की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि सभी प्रस्तावित उम्मीदवारों की गहराई से जांच की गई। इसमें उनके कानूनी कार्य, विशेषज्ञता, पेशेवर अनुभव, आय और सार्वजनिक छवि को शामिल किया गया। उपलब्ध रिकॉर्ड और विभिन्न स्रोतों से जुटाई गई जानकारी के आधार पर कॉलेजियम इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि सभी अधिवक्ताओं की प्रतिष्ठा अच्छी है और उनकी ईमानदारी पर कोई सवाल नहीं उठता।
अनुभव और योग्यता को मिली प्राथमिकता
रिपोर्ट में एक उम्मीदवार का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिन्हें सेवा कानून, सिविल कानून, श्रम कानून और संवैधानिक कानून में व्यापक अनुभव है। वे चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के लिए जूनियर पैनल काउंसिल के तौर पर भी सेवाएं दे चुके हैं। पिछले पांच वर्षों में उनकी औसत वार्षिक आय 7 लाख रुपये से अधिक रही है। कॉलेजियम ने उनके अनुभव और कार्यशैली को देखते हुए उन्हें न्यायाधीश पद के लिए पूरी तरह उपयुक्त माना।
पंजाब और हरियाणा बार से ये नाम आगे
कॉलेजियम ने हाईकोर्ट में उपलब्ध रिक्त पदों को ध्यान में रखते हुए कुल 7 अधिवक्ताओं के नामों की सिफारिश की है। इनमें पंजाब बार और हरियाणा बार से जुड़े अधिवक्ता शामिल हैं।
पंजाब बार से प्रस्तावित नाम:
-
सुश्री मोनिका छिब्बर शर्मा
-
श्री हरमीत सिंह देओल
-
सुश्री पूजा चोपड़ा
हरियाणा बार से प्रस्तावित नाम:
-
श्री सुनीश बिंदलिश
-
श्री नवदीप सिंह
-
सुश्री दिव्या शर्मा
-
श्री रविंदर मलिक
नियुक्ति प्रक्रिया में अगला कदम
अब इन नामों को केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा, जहां से आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्तियों पर अंतिम मुहर लगेगी। यदि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी होती हैं, तो जल्द ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को नए न्यायाधीश मिल सकते हैं, जिससे मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।
