केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के एक नए फैसले ने एक बार फिर किसान हितों को लेकर बहस छेड़ दी है। सरकार ने न्यूज़ीलैंड के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) साइन किया है। इस समझौते के तहत सेब पर लगने वाले आयात शुल्क (टैरिफ) को 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है।
भारतीय सेब किसानों पर सीधा असर
इस फैसले का सीधा असर भारत के सेब उगाने वाले किसानों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कम टैरिफ के कारण विदेशी सेब भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे, जिससे स्थानीय किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य मिलना मुश्किल हो सकता है। खासकर पहाड़ी राज्यों और सेब उत्पादक इलाकों के किसानों में चिंता बढ़ गई है।
स्पीकर संधवां का तीखा बयान
इस मुद्दे पर कुलतार सिंह संधवां, स्पीकर, पंजाब विधानसभा, ने केंद्र सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह फैसला साफ तौर पर किसान विरोधी है और इससे देश के मेहनती सेब किसानों को नुकसान होगा।
फैसला वापस लेने की मांग
संधवां ने मांग की है कि BJP सरकार को यह फैसला तुरंत वापस लेना चाहिए। उनका कहना है कि अगर सरकार ने किसानों की आवाज नहीं सुनी, तो उसे एक बार फिर बड़े किसान विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
किसानों में बढ़ती नाराज़गी
किसान संगठनों का भी मानना है कि बिना पर्याप्त सुरक्षा के ऐसे व्यापारिक समझौते करना घरेलू कृषि के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या केंद्र सरकार किसानों की चिंता को समझते हुए इस फैसले पर पुनर्विचार करेगी या नहीं।
