मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने बच्चों की सुरक्षा और उनके बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक सराहनीय कदम उठाया है। राज्य में अब भीख मांगते बच्चों का डीएनए टेस्ट करवाया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं ये बच्चे अगवा तो नहीं किए गए। इस अभियान के तहत ऐसे बच्चों को बचाकर उनके असली माता-पिता तक पहुंचाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मुहिम को देश की एक गंभीर त्रासदी करार देते हुए कहा कि यह बेहद दुखद है कि कुछ लोग मासूम बच्चों से भीख मंगवाने जैसे अमानवीय काम करवा रहे हैं। अमरगढ़ में एक नए सब-डिवीजन के उद्घाटन के मौके पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि बहुत से मामलों में बच्चे अगवा करके या बहला-फुसलाकर लाए जाते हैं और फिर उनसे जबरन भीख मंगवाई जाती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी खुलासा किया कि इन मासूम बच्चों को अधिक “दया” दिलाने के लिए कुछ अपराधी उन्हें जानबूझकर अपाहिज भी बना देते हैं। उन्होंने कहा कि यह न केवल एक आपराधिक कृत्य है बल्कि समाज की संवेदनाओं से भी खिलवाड़ है।
पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई इस मुहिम के सकारात्मक नतीजे सामने आने लगे हैं। अब तक कई बच्चों को उनके माता-पिता से मिलवाया जा चुका है, कुछ को आंगनवाड़ी केंद्रों में दाखिल किया गया है और अन्य को स्कूलों में भेजा गया है ताकि वे पढ़-लिखकर अपना भविष्य संवार सकें।
सरकार ने यह भी ऐलान किया है कि बच्चों की तस्करी, उनसे जबरन काम करवाने और उन पर किसी भी प्रकार का अत्याचार करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
इस मुहिम के तहत सरकार बच्चों के समुचित पुनर्वास पर भी काम कर रही है। इसमें स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, मानसिक परामर्श और परिवार से पुनर्मिलन जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं। पंजाब सरकार का यह कदम न केवल मानवता की सेवा है, बल्कि समाज को एक सुरक्षित, जागरूक और संवेदनशील दिशा में आगे ले जाने वाला प्रयास भी है।
