देशभर में जीएसटी सुधार लागू हो गए हैं और इसका सबसे बड़ा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलने वाला है। दूध, घी, तेल जैसे रोज़मर्रा के सामान से लेकर टीवी, एसी और कार-बाइक तक सस्ते हो गए हैं। वहीं, सरकार ने बीमा प्रीमियम को भी पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया है। यानी अब लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी शून्य होगा।
अब प्रीमियम पर टैक्स का बोझ खत्म
पहले बीमा प्रीमियम पर 18% जीएसटी लगाया जाता था। इसका सीधा असर पॉलिसी होल्डर्स पर पड़ता था और उन्हें हर महीने या सालाना प्रीमियम के साथ अतिरिक्त रकम चुकानी पड़ती थी। लेकिन अब इस टैक्स को पूरी तरह हटा दिया गया है। इसका मतलब है कि अब ग्राहक सिर्फ बेस प्रीमियम का ही भुगतान करेंगे और अतिरिक्त जीएसटी नहीं देना होगा।
प्रीमियम बचत का आसान कैलकुलेशन
अगर किसी व्यक्ति का मासिक इंश्योरेंस प्रीमियम 30,000 रुपये था, तो पहले उस पर 18% यानी 5,400 रुपये का जीएसटी जुड़ जाता था। ऐसे में हर महीने कुल 35,400 रुपये चुकाने पड़ते थे। लेकिन अब सिर्फ 30,000 रुपये देने होंगे, यानी सीधी बचत 5,400 रुपये की।
इसी तरह, अगर किसी का प्रीमियम 10,000 रुपये है, तो उस पर पहले 1,800 रुपये टैक्स लगता था। अब यह रकम सीधे बच जाएगी।
टर्म इंश्योरेंस भी हुआ सस्ता
मान लीजिए किसी ने 1 करोड़ रुपये का टर्म इंश्योरेंस लिया है और उसका सालाना बेस प्रीमियम 15,000 रुपये है। पहले इस पर 18% टैक्स यानी 2,700 रुपये जुड़कर कुल 17,700 रुपये चुकाने पड़ते थे। अब टैक्स हटने से केवल 15,000 रुपये ही देने होंगे।
फैमिली फ्लोटर प्लान पर भी राहत
फैमिली फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस पर भी अब ग्राहकों को बड़ी राहत मिलेगी। उदाहरण के लिए, 10 लाख रुपये के कवरेज पर सालाना प्रीमियम 25,000 रुपये होता है। पहले इसमें 18% टैक्स यानी 4,500 रुपये और जुड़कर कुल 29,500 रुपये देना पड़ता था। अब यह टैक्स हटने से सीधे 4,500 रुपये की बचत होगी।
बीमा कंपनियों पर असर
जहां ग्राहकों को यह फैसला राहत देने वाला है, वहीं बीमा कंपनियों के लिए यह चुनौती भी बन सकता है। अब तक बीमा कंपनियां मार्केटिंग, ऑफिस किराए और कमीशन पर चुकाए गए टैक्स को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के तहत समायोजित कर लेती थीं। लेकिन अब सरकार ने साफ किया है कि बीमा कंपनियां हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस से जुड़ी सेवाओं पर ITC का दावा नहीं कर पाएंगी। इसका मतलब है कि कंपनियों को यह अतिरिक्त लागत खुद वहन करनी होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बीमा कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है। हालांकि, यह देखना अहम होगा कि कंपनियां इस अतिरिक्त लागत को खुद वहन करती हैं या फिर इसे ग्राहकों पर डालते हुए बेस प्रीमियम में हल्की वृद्धि करती हैं।
जीएसटी सुधारों के तहत इंश्योरेंस को टैक्स फ्री करना पॉलिसीहोल्डर्स के लिए बड़ी राहत है। अब लोगों को अपने प्रीमियम पर भारी टैक्स नहीं देना होगा और उनकी जेब से कम पैसा निकलेगा। हालांकि, बीमा कंपनियों के सामने ITC खत्म होने की चुनौती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां अपने बढ़े खर्च को कैसे मैनेज करती हैं।
