पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर भारत की ओर बढ़ रहा है। यह वही समुद्री मार्ग है जो इस समय वैश्विक तनाव के कारण काफी संवेदनशील बना हुआ है। इस टैंकर के सुरक्षित निकलने से भारत की गैस सप्लाई को लेकर चिंता कुछ हद तक कम हुई है।
सातवां भारतीय टैंकर जिसने पार किया होर्मुज
रिपोर्ट के अनुसार, ‘ग्रीन सान्वी’ इस संकट के दौरान होर्मुज पार करने वाला सातवां भारतीय एलपीजी टैंकर बन गया है। इससे पहले भी छह भारतीय जहाज इस खतरनाक समुद्री रास्ते को पार कर चुके हैं और भारत पहुंच चुके हैं। यह लगातार हो रही सफलता भारत के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
टैंकर में कितना LPG और क्यों है अहम
इस टैंकर में लगभग 44,000 से 58,000 मीट्रिक टन LPG (रसोई गैस) लदी हुई है। यह मात्रा भारत की जरूरतों के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि देश अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मात्रा भारत की एक दिन की खपत का बड़ा हिस्सा पूरा कर सकती है, खासकर ऐसे समय में जब सप्लाई प्रभावित है।
कैसे पार किया खतरनाक समुद्री रास्ता
‘ग्रीन सान्वी’ ने होर्मुज पार करने के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित मार्ग का इस्तेमाल किया, जिसे लारक-केश्म चैनल कहा जाता है। जहाज ने अपना ट्रैकिंग सिस्टम चालू रखा और खुद को “इंडियन शिप, इंडियन क्रू” के रूप में पहचान दी, ताकि किसी तरह की गलत पहचान या खतरे से बचा जा सके। यह रणनीति हाल के दिनों में भारतीय जहाजों द्वारा अपनाई जा रही है।
अभी भी कई जहाज फंसे हुए
हालांकि यह राहत भरी खबर है, लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय तेल और गैस से जुड़े जहाज अब भी होर्मुज के आसपास फंसे हुए हैं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए अनुमति का इंतजार है। ‘ग्रीन आशा’ और ‘जग विक्रम’ जैसे अन्य टैंकर अभी भी वहीं रुके हुए हैं।
क्यों इतना अहम है होर्मुज स्ट्रेट
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित करता है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है, इसलिए इस मार्ग का खुला रहना बेहद जरूरी है।
