मालेगांव धमाके से जुड़े बहुचर्चित मामले में गुरुवार को NIA की विशेष अदालत ने सभी सातों आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में असफल रहा और किसी ठोस सबूत के अभाव में किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
कोर्ट का स्पष्ट संदेश: संदेह के आधार पर नहीं हो सकती सज़ा
फैसला सुनाते हुए जस्टिस एके लाहोटी ने कहा कि “आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता क्योंकि कोई भी धर्म हिंसा को प्रोत्साहित नहीं करता।” उन्होंने लिखा कि केवल नैरेटिव या संदेह के आधार पर किसी पर आरोप नहीं लगाया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण रिकॉर्ड में नहीं है जिससे यह साबित हो कि कर्नल पुरोहित ने आरडीएक्स लाया था या बम असेंबल किया गया था। साथ ही यह भी सिद्ध नहीं हो सका कि धमाके में इस्तेमाल बाइक साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की थी।
पूर्व ATS अधिकारी का दावा: RSS प्रमुख को गिरफ्तार करने का दबाव था
कोर्ट के इस फैसले के बाद पूर्व एटीएस अधिकारी महबूब मुजावर ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उस वक्त के जांच अधिकारी परमवीर सिंह और उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने RSS प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था।
भगवा आतंकवाद साबित करने का दबाव, लेकिन किया विरोध
महबूब मुजावर ने बताया कि उनसे भगवा आतंकवाद का नैरेटिव स्थापित करने के लिए झूठी जांच करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि “मुझसे कहा गया कि मैं मारे गए लोगों को चार्जशीट में जिंदा दिखाऊं, लेकिन मैंने इनकार कर दिया।”
उनके मुताबिक इनकार करने पर उन्हें झूठे केस में फंसा दिया गया, लेकिन वह इन सभी मामलों में बरी हो चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “चाहे भगवा हो या हरा, आतंकवाद समाज के लिए घातक है।”
मामले में कौन-कौन थे आरोपी
इस केस में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, सुधाकर चतुर्वेदी, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय सहित सात लोगों पर आरोप था। सभी को अब बरी कर दिया गया है।
क्या हुआ था 29 सितंबर 2008 को?
मालेगांव के भीकू चौक पर एक दोपहिया वाहन में बम विस्फोट हुआ था। इस धमाके में 6 लोगों की मौत और 101 लोग घायल हुए थे। मृतकों में फरहीन उर्फ शगुफ्ता शेख, शेख मुश्ताक यूसुफ, शेख रफीक, इरफान खान, सैयद अजहर और हारून शाह शामिल थे।
इस ऐतिहासिक फैसले के साथ कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया है कि कानून सिर्फ तथ्यों और सबूतों पर चलता है, न कि भावनाओं और नैरेटिव्स पर। वहीं, पूर्व अधिकारी के खुलासे ने मामले में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
