पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक ट्वीट के जरिए सिख इतिहास के अत्यंत महत्वपूर्ण शहीदी सप्ताह की शुरुआत की जानकारी दी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि शहीदी सप्ताह आज 06 पोह से आरंभ हो रहा है, जो सिख धर्म के गौरवशाली और त्यागपूर्ण इतिहास की याद दिलाता है।
06 पोह का ऐतिहासिक महत्व
मुख्यमंत्री के अनुसार, इसी दिन सिखों के दसवें गुरु, सरबंसदानी दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने परिवार और खालसा संगत के साथ श्री आनंदगढ़ साहिब का किला छोड़ा था। यह वह समय था जब मुगल शासकों और पहाड़ी राजाओं की सेनाओं ने आनंदगढ़ साहिब को चारों ओर से घेर रखा था।
वादे और विश्वास की परीक्षा
इतिहास के अनुसार, मुगल और पहाड़ी राजाओं की ओर से वजीर गुरु साहिब के पास आए और उनसे किला छोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने यह कसम खाई कि यदि गुरु साहिब अपनी सेना सहित किला छोड़ देते हैं, तो उनके साथ कोई अन्याय नहीं किया जाएगा और युद्ध को वहीं समाप्त मान लिया जाएगा।
गुरु साहिब का निर्णय
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को इन वादों पर भरोसा नहीं था, इसलिए उन्होंने शुरुआत में किला छोड़ने से इनकार कर दिया। लेकिन जब सिंहों ने गुरु साहिब से संगत की रक्षा के लिए यह कदम उठाने का निवेदन किया, तब गुरु जी ने अपने परिवार और खालसा के साथ किला छोड़ने का कठिन निर्णय लिया।
बलिदान की अमर गाथा
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने संदेश के माध्यम से कहा कि शहीदी सप्ताह हमें सिख इतिहास के उन अमर बलिदानों की याद दिलाता है, जिन्होंने धर्म, सत्य और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। यह सप्ताह आने वाली पीढ़ियों को साहस, त्याग और सच्चाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
शहीदी सप्ताह के दौरान पूरे पंजाब में श्रद्धा और सम्मान के साथ गुरुओं और शहीदों को याद किया जाता है।
