ईरान में आंदोलन बना क्रांति, 18वें दिन भी जारी संघर्ष; युवा प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी को फांसी का खतरा
ईरान में सरकार विरोधी आंदोलन अब एक बड़े जनआंदोलन और क्रांति का रूप ले चुका है। यह आंदोलन लगातार 18वें दिन भी जारी है। देशभर में लोग सड़कों पर उतरकर खामेनेई शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच लगातार हिंसक झड़पें हो रही हैं।
हजारों मौतें और गिरफ्तारियां
मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, अब तक सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 2,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 10,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। सरकार आंदोलन को कुचलने के लिए बेहद सख्त कदम उठा रही है, जिससे देश में डर और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं।
युवा दुकानदार इरफान सुल्तानी पर मौत का साया
इस आंदोलन के बीच 26 वर्षीय युवा प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी का मामला पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है। इरफान मध्य ईरान के फार्दिस इलाके में कपड़ों की दुकान चलाते थे। 8 जनवरी को उन्हें शासन विरोधी प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में उनके घर से गिरफ्तार किया गया था। अब आशंका है कि उन्हें सरेआम फांसी दी जा सकती है।
‘अल्लाह के खिलाफ युद्ध’ का आरोप
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन के अनुसार, 11 जनवरी को इरफान की एक संक्षिप्त सुनवाई हुई। इसके बाद ईरानी अधिकारियों ने उन पर ‘मोहारेबेह’, यानी ‘अल्लाह के खिलाफ युद्ध छेड़ने’ का आरोप लगाते हुए मौत की सजा सुना दी। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि उनका असली “अपराध” सिर्फ आज़ादी के नारे लगाना था।
परिवार को सिर्फ 10 मिनट की आखिरी मुलाकात
इरफान के परिवार को करीब पांच दिन पहले उनकी फांसी की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया है कि फांसी से पहले इरफान को अपने परिवार से केवल 10 मिनट की आखिरी मुलाकात की अनुमति दी जाएगी। परिवार इस खबर से सदमे में है और गहरे डर व निराशा के दौर से गुजर रहा है।
कानूनी अधिकारों से वंचित होने का आरोप
हेंगॉव ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स की सदस्य अरिना मोरादी के मुताबिक, इरफान को गिरफ्तारी के बाद से ही बुनियादी कानूनी अधिकार नहीं दिए गए। उन्हें वकील से मिलने, केस फाइल देखने और खुद का बचाव करने का पूरा मौका नहीं मिला। बताया गया है कि इरफान की बहन खुद एक लाइसेंस प्राप्त वकील हैं, फिर भी उन्हें केस से जुड़ी फाइलें नहीं दी जा रहीं।
सरेआम फांसी से फैल सकता है डर
मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि इरफान को बीच चौराहे पर फांसी देकर प्रदर्शनकारियों में डर फैलाने की कोशिश की जा रही है। परिवार का कहना है कि इरफान कभी कोई राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि वह युवा पीढ़ी का हिस्सा थे जो देश की मौजूदा हालत से नाराज़ होकर सड़कों पर उतरी।
ट्रंप की धमकी और अंतरराष्ट्रीय दबाव
इस पूरे मामले पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देना शुरू करता है, तो अमेरिका सख्त जवाब देगा। ट्रंप पहले ही ईरानी जनता से आंदोलन जारी रखने की अपील कर चुके हैं।
ईरान का पलटवार
वहीं ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने ट्रंप की धमकी पर पलटवार करते हुए अमेरिका और इजरायल पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विदेशी ताकतें ईरान में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रही हैं।
फैसले से बदल सकती है दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इरफान सुल्तानी को सरेआम फांसी दी जाती है, तो यह आंदोलन को दबाने के बजाय और भड़का सकता है। ऐसे में यह कदम खामेनेई शासन के लिए भारी पड़ सकता है और ईरान के भविष्य की दिशा बदल सकता है।
