संसद सदस्य विक्रमजीत सिंह साहनी ने श्री गुरु नानक देव जी के गुरुपर्व के अवसर पर बंदी दविंदर पाल सिंह भुल्लर की तुंरत रिहाई की अपील की है। उन्होंने दिल्ली सरकार से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सजा समीक्षा बोर्ड की तुरंत बैठक बुलाने का अनुरोध किया।
साहनी ने कहा कि दविंदर पाल सिंह भुल्लर 1993 से जेल में हैं और उन्होंने तीन दशकों से अधिक समय का दंड पूरा कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार, वह निष्पक्ष समीक्षा के हकदार हैं। साहनी ने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार ने पहले 21 दिसंबर 2023 को हुई समीक्षा बोर्ड की आखिरी बैठक में भुल्लर की रिहाई की सिफारिश की थी, लेकिन उस प्रस्ताव को 6:1 के वोट से खारिज कर दिया गया।
संसद सदस्य ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से अपील की है कि वह बिना देरी किए सजा समीक्षा बोर्ड की बैठक बुलाएं और श्री गुरु नानक देव जी के गुरुपर्व के मौके पर 5 नवंबर को भुल्लर की रिहाई का समय तय करें। उनका कहना है कि यह कदम न्याय की भावना को कायम रखने और मानवता की तरफ एक संदेश देने वाला होगा।
साहनी ने पहले भी समाजिक न्याय और मानवाधिकार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। उन्होंने हाल ही में जगतार सिंह हवारा के लिए पैरोल की भी अपील की थी, जिनकी मां बीमार हैं। साहनी का कहना है कि धर्म और मानवता के मूल्यों को ध्यान में रखते हुए न्याय सुनिश्चित करना जरूरी है।
इस अपील के माध्यम से साहनी ने यह संदेश दिया है कि बंदियों की रिहाई केवल कानून का मसला नहीं है, बल्कि यह मानवता और सहानुभूति का मामला भी है। गुरुपर्व के इस पावन अवसर पर, भुल्लर की रिहाई को लेकर उनकी अपील सामाजिक और धार्मिक महत्व भी रखती है।
साहनी की इस पहल को मानवाधिकार समर्थक और समाज के अनेक वर्गों ने सराहा है। उनका कहना है कि न्यायपालिका और सरकार को मिलकर ऐसे कदम उठाने चाहिए जो समाज में भरोसा और विश्वास को मजबूत करें।
