पंजाब में बिजली क्षेत्र ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किया है, जो राज्य सरकार की प्रभावी नीतियों और दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। पीएसपीसीएल को राष्ट्रीय स्तर पर ए+ रेटिंग मिलना और देश में दूसरा स्थान हासिल करना इस बात का प्रमाण है कि राज्य ने बिजली प्रबंधन में नई मिसाल कायम की है।
पंजाब सरकार का सबसे बड़ा फोकस आम जनता को राहत देना रहा है। वर्तमान में राज्य में लगभग 90% घरों को मुफ्त बिजली का लाभ मिल रहा है। घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जा रही है, जिससे अधिकांश परिवारों के बिजली बिल शून्य आ रहे हैं। खास बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर सब्सिडी देने के बावजूद बिजली विभाग अब घाटे से निकलकर मुनाफे की स्थिति में पहुंच गया है।
बिजली उपलब्धता को मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़े फैसले लिए हैं। गोइंदवाल साहिब थर्मल पावर प्लांट के 540 मेगावाट प्लांट का अधिग्रहण कर उत्पादन क्षमता बढ़ाई गई है। इससे राज्य में बिजली की कमी को काफी हद तक दूर किया गया है और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हुई है।
इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर भी व्यापक सुधार किए गए हैं। नए सबस्टेशन, ट्रांसफार्मर और लाइन अपग्रेडेशन के जरिए बिजली नेटवर्क को मजबूत बनाया गया है। व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए टैरिफ में कमी की गई है, जिससे उद्योगों को बढ़ावा मिला है। वहीं किसानों को निर्बाध और पर्याप्त बिजली आपूर्ति दी जा रही है, जो कृषि उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
कृषि क्षेत्र में बिजली आपूर्ति का सकारात्मक असर साफ नजर आ रहा है। पहले जहां सिंचाई के लिए सिर्फ 22% नहरी पानी का उपयोग होता था, अब यह बढ़कर 78% तक पहुंच गया है, जिससे ट्यूबवेल पर निर्भरता कम हुई है। धान सीजन के दौरान किसानों को 8 घंटे से अधिक बिजली और 95% दिन के समय आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
पंजाब सरकार ने सस्ती, निर्बाध और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराकर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। यह मॉडल न केवल राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि आम लोगों, किसानों और उद्योगों को भी समान रूप से सशक्त कर रहा है।
