भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। सप्ताह के पहले ही दिन दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली का ऐसा तूफान आया कि निवेशकों के देखते ही देखते लाखों करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,312.91 अंक (1.70%) गिरकर 76,015.28 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी भी 360 अंकों की भारी गिरावट के साथ 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया।
क्यों टूटा बाजार? ये हैं 3 बड़े कारण
बाजार में इस भारी गिरावट के पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि घरेलू और वैश्विक कारणों का एक ‘डेडली कॉम्बिनेशन’ रहा:
1. कच्चे तेल की कीमतों में आग: ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता विफल होने की खबरों ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी। ब्रेंट क्रूड की कीमतें $105 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए महंगाई का खतरा बढ़ गया।
2. प्रधानमंत्री की ‘मितव्ययिता’ (Austerity) की अपील: रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल, डीजल और विशेष रूप से सोने की खरीद में एक साल तक कटौती करने की अपील की
3. रुपये की ऐतिहासिक गिरावट: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 85 पैसे कमजोर होकर 95.34 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
टाइटन और SBI के शेयरों में सबसे बड़ी मार
आज के कारोबार में सबसे ज्यादा चोट टाइटन (Titan) के शेयरों को लगी। पीएम मोदी द्वारा सोने की खरीद कम करने की अपील के बाद टाइटन का शेयर 6% से ज्यादा टूट गया। इसके अलावा, देश के सबसे बड़े बैंक SBI के चौथी तिमाही के नतीजे उम्मीद के मुताबिक न रहने के कारण इसमें भी 4% की भारी गिरावट दर्ज की गई। बैंकिंग, ऑटो और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में आज सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई।
बाजार में आई इस गिरावट से एक ही दिन में निवेशकों की करीब 6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति कम हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में ऐसी अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि, इस गिरावट के बीच टाटा कंज्यूमर और सन फार्मा जैसे कुछ डिफेंसिव शेयरों ने अपनी पकड़ बनाए रखी और मामूली बढ़त के साथ बंद हुए।
