चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI) के लगभग 3500 ठेका कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक दिन आ गया है। वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे इन कर्मचारियों को आखिरकार बड़ी राहत मिली है। केंद्र सरकार ने PGI में स्थायी कर्मचारियों के बराबर वेतन और सुविधाएं लागू करने को मंजूरी दे दी है। अब कर्मचारियों को DC रेट प्रणाली को अलविदा कहना होगा, और उन्हें औसतन 7000 रुपये प्रति माह वेतन में वृद्धि का लाभ मिलेगा।
50 करोड़ रुपये का बकाया मिलेगा, 13 जनवरी से प्रभावी
इस फैसले का लाभ 13 जनवरी 2024 से लागू होगा, और कर्मचारियों को पिछले 19 महीनों का वेतन अंतर, यानी करीब 50 करोड़ रुपये का बकाया भी मिलेगा। सफाई कर्मचारी, सुरक्षा गार्ड, रसोई कर्मचारी और हॉस्पिटल स्टाफ सभी को इस फैसले से फायदा होगा। उदाहरण के तौर पर, पहले जिन सफाई कर्मचारियों को 20,000 रुपये मासिक वेतन मिलता था, उन्हें अब 27,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे।
पेटिशन और संघर्ष का परिणाम
PGI प्रशासन ने 6 दिसंबर 2024 को अपनी आठवीं पेटिशन केंद्रीय सलाहकार अनुबंध श्रम बोर्ड (CACLB) के समक्ष पेश की थी, जिसमें 13 जनवरी 2024 से 12 जनवरी 2026 तक के लिए राहत मांगी गई थी। दरअसल, 9 अक्टूबर 2018 को बोर्ड ने पहले भी दो साल की छूट दी थी, लेकिन इस शर्त के साथ कि ठेका कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों के बराबर वेतन और सुविधाएं दी जाएं। हालांकि इस नियम को लागू करने में देरी होती रही।
साझा एक्शन कमेटी और श्रमिक संगठनों की सक्रिय भूमिका
इस फैसले को अमलीजामा पहनाने में साझा एक्शन कमेटी (JAC) और भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब श्रम मंत्रालय ने इस निर्णय को पिछले समय से लागू करने में कानूनी अड़चनों का हवाला दिया, तब JAC ने सीधे केंद्रीय कानून मंत्री से संपर्क कर सहयोग की मांग की। लगातार फॉलो-अप और दबाव के बाद, 16 जुलाई को कानून मंत्रालय ने अपनी मंजूरी दे दी।
एक नई शुरुआत, संघर्ष रहेगा जारी
JAC के चेयरमैन अश्वनी कुमार मुंजाल ने इसे कर्मचारियों की इज्ज़त और अधिकारों की ऐतिहासिक जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है और आगे भी कर्मचारियों के हकों की लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने केंद्र सरकार और मंत्रालयों का आभार जताया और कहा कि अब PGI के ठेका कर्मचारी सम्मानजनक वेतन और सुविधाओं के हकदार बन गए हैं।यह फैसला न केवल ठेका कर्मचारियों के आर्थिक जीवन को मजबूती देगा, बल्कि उनके सामाजिक सम्मान और आत्मविश्वास को भी बढ़ाएगा। वर्षों का संघर्ष रंग लाया है और अब PGI के हजारों कर्मचारी एक नई उम्मीद के साथ आगे बढ़ सकेंगे।
