पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने हाल ही में सामने आए एक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार की चुप्पी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है और व्यापार या ऊर्जा से जुड़े फैसले देश के राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर ही लिए जाने चाहिए।
संधवां ने कहा कि भारत किस देश से तेल या अन्य संसाधन खरीदेगा, यह फैसला पूरी तरह देश की अपनी नीति और जरूरतों पर निर्भर होना चाहिए। इसके लिए किसी अन्य देश की अनुमति या दबाव स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
अमेरिका के बयान पर जताई चिंता
उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीदने को लेकर 30 दिनों की समय-सीमा की बात सामने आई है, जो चिंता का विषय है। संधवां के अनुसार इस तरह के बयान से ऐसा प्रतीत होता है कि भारत की आर्थिक नीतियों पर बाहरी दबाव बनाने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भारत सरकार की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जो कई सवाल खड़े करती है। उनका कहना था कि देश के नागरिक उम्मीद करते हैं कि सरकार राष्ट्रीय हित और संप्रभु अधिकारों की रक्षा के लिए स्पष्ट रुख अपनाए।
आर्थिक फैसलों में स्वतंत्रता पर जोर
संधवां ने कहा कि एक स्वतंत्र देश के रूप में भारत को अपने आर्थिक और व्यापारिक फैसले पूरी स्वतंत्रता के साथ लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ऐसा देश नहीं है जिसे किसी अन्य राष्ट्र द्वारा तय की गई समय-सीमाओं या निर्देशों के आधार पर अपने फैसले लेने पड़ें।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय हित को हमेशा सर्वोपरि रखा जाना चाहिए और किसी भी बाहरी दबाव के सामने झुकना देश के लिए उचित नहीं है।
कॉरपोरेट हितों को लेकर भी सवाल
पंजाब विधानसभा के स्पीकर ने यह सवाल भी उठाया कि क्या केंद्र सरकार की चुप्पी के पीछे कुछ बड़े कॉरपोरेट हितों का प्रभाव हो सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ बड़ी कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय कारोबार और सत्ता से उनके संबंधों को लेकर भी चर्चा हो रही है।
उनका कहना था कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देश की नीतियां किसी भी निजी या व्यावसायिक हित से प्रभावित न हों।
प्रधानमंत्री से स्पष्ट रुख की अपील
संधवां ने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि देश के हितों को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की नीतियों में स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और राष्ट्रीय संप्रभुता की स्पष्ट झलक दिखाई देनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अपने आर्थिक और रणनीतिक फैसले पूरी तरह स्वतंत्र रूप से लेने चाहिए और किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करना चाहिए।
