मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने बाढ़ प्रभावित लोगों से किया वादा निभाते हुए दीवाली से पहले राहत राशि वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार ने राज्यभर के बाढ़ पीड़ितों के लिए 209 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की है। इस राशि में से संगरूर जिले को 3.50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
आज पंजाब के वित्त और योजना मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने धूरी विधानसभा क्षेत्र में आठ बाढ़ प्रभावित परिवारों को स्वीकृति पत्र सौंपकर राहत वितरण अभियान की शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि राज्यभर में 13 कैबिनेट मंत्री एक साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर “मिशन पुनर्वास” के तहत राहत राशि बाँट रहे हैं।
“मिशन पुनर्वास” की शुरुआत अजनाला से
इस मिशन की शुरुआत मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अजनाला से की थी, जहाँ उन्होंने 631 किसानों को 5.70 करोड़ रुपये के चेक वितरित किए। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार किसानों को प्रति एकड़ 20,000 रुपये मुआवजा दिया जा रहा है। यह कदम पंजाब सरकार की किसान-हितैषी नीतियों का प्रमाण है।
हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि सरकार ने राहत राशि का निर्धारण पूरी पारदर्शिता से किया है। हर प्रभावित परिवार को नुकसान के वास्तविक आकलन के बाद मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहली बार पूरी तरह क्षतिग्रस्त घरों को 40,000 रुपये की सहायता दी जाएगी, जबकि पहले केवल 4,000 रुपये मिलते थे।
किसानों और आम जनता के साथ सरकार
मंत्री चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार हर सुख-दुख में जनता के साथ खड़ी है। बाढ़ के समय सरकार ने समय पर राहत और बचाव कार्य शुरू किए, जिससे नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सका। उन्होंने बताया कि संगरूर जिला प्रशासन ने बेहतरीन काम किया — घग्गर नदी में पानी का स्तर 755 फीट तक पहुंचने के बावजूद कोई तटबंध नहीं टूटा, जबकि पहले 747 फीट पर ही खतरा बढ़ जाता था।
उन्होंने संगरूर प्रशासन और स्थानीय टीमों की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से बाढ़ जैसी बड़ी चुनौती पर नियंत्रण पाया जा सका।
केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप
हरपाल सिंह चीमा ने इस अवसर पर केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब और पंजाबियों के साथ हर क्षेत्र में अलग रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पंजाब दौरे के दौरान घोषित 1,600 करोड़ रुपये की सहायता राशि जल्द जारी करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक केंद्र द्वारा जारी 240 करोड़ रुपये सिर्फ वार्षिक किस्त का हिस्सा हैं, बाढ़ राहत से उसका कोई सीधा संबंध नहीं है।
प्रशासन और जनता का सहयोग
संगरूर के डिप्टी कमिश्नर राहुल चाबा ने बताया कि पंजाब सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए पहले से ही आपात प्रबंधन की तैयारी की गई थी। यही कारण है कि भारी बारिश के बावजूद जिले में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
पंजाब सरकार का यह कदम न सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी का उदाहरण है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि राज्य हर मुश्किल घड़ी में अपने नागरिकों के साथ खड़ा है। दीवाली से पहले मिली यह राहत राशि निश्चित रूप से बाढ़ पीड़ित परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लेकर आई है।
