पंजाब सरकार ने राज्य में प्रशासनिक पारदर्शिता और कर्मचारियों की कार्य-कुशलता बढ़ाने की दिशा में एक और अहम पहल की है। रजिस्ट्रार सहकारी सभाएं और राज्य की प्रमुख सहकारी संस्थाओं के सभी कार्यालयों में अब कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए “एमसेवा ऐप” का उपयोग अनिवार्य किया जाएगा। यह कदम राज्य के नागरिकों को समयबद्ध और प्रभावशाली सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पायलट ट्रायल 1 अगस्त से, पूर्ण रूप से लागू होगा 1 सितंबर से
रजिस्ट्रार सहकारी सभाएं, पंजाब के श्री गिरीश दयालन ने इस नई प्रणाली की जानकारी देते हुए बताया कि “एमसेवा ऐप” का पायलट ट्रायल 1 अगस्त 2025 से शुरू होगा। यह परीक्षण चरण एक महीने तक चलेगा और इसमें सभी संबंधित कर्मचारियों की भागीदारी को अनिवार्य बनाया गया है ताकि ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को सहज बनाया जा सके। इस ट्रायल के सफल संपन्न होने के बाद, 1 सितंबर 2025 से यह प्रणाली पूरी तरह से लागू कर दी जाएगी।
उपस्थिति पर निगरानी और अनियमितताओं पर लगाम
श्री दयालन ने बताया कि इस डिजिटल उपस्थिति प्रणाली का प्रमुख उद्देश्य कार्यालय में कर्मचारियों की उपस्थिति पर पारदर्शी और वास्तविक समय की निगरानी करना है। यह प्रणाली कार्यस्थल पर समय की पाबंदी को बढ़ावा देगी, साथ ही उपस्थिति में आने वाली अनियमितताओं को प्रभावी रूप से नियंत्रित करने में मदद करेगी।
तकनीक से जुड़ेगा प्रशासन, बढ़ेगी जवाबदेही
इस योजना को सफल बनाने के लिए सुधारित प्रशासन और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग भी तकनीकी सहायता और समर्थन प्रदान करेंगे। श्री दयालन ने बताया कि इस डिजिटल समाधान के माध्यम से कर्मचारियों की निगरानी आसान होगी और उनकी जवाबदेही भी बढ़ेगी। इसके परिणामस्वरूप नागरिकों को सरकारी सेवाएं अधिक तेज और दक्ष रूप में प्राप्त होंगी।
नागरिकों की सेवा में तकनीक का इस्तेमाल
पंजाब सरकार की यह पहल न केवल सरकारी कामकाज को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह तकनीक के माध्यम से नागरिकों तक सुचारु और समय पर सेवाएं पहुंचाने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। “एमसेवा ऐप” का यह उपयोग भविष्य में अन्य विभागों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।
